अक्सर दिनभर की थकान के बाद जब हम शाम को चाय की चुस्की लेते हैं, तो उसके साथ कुछ चटपटा या मीठा खाने की तीव्र इच्छा होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शाम की यही ‘क्रेविंग’ आपके वजन बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है? एक्सपर्ट्स का मानना है कि शाम के समय होने वाली यह भूख पूरी तरह वैज्ञानिक है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना आपकी सेहत पर भारी पड़ सकता है।
क्यों लगती है शाम को ज्यादा भूख?
न्यूट्रिशनिस्ट नमामी अग्रवाल के अनुसार, शाम होते ही शरीर में लेप्टिन नामक हार्मोन का स्तर गिरने लगता है, जो हमारी भूख को नियंत्रित करता है। जैसे ही लेप्टिन कम होता है, शरीर की ऊर्जा घटने लगती है और दिमाग तुरंत शुगर या रिफाइंड कार्ब्स (जैसे बिस्किट, समोसे या चिप्स) की मांग करने लगता है। इसके अलावा, अगर आपने दोपहर के भोजन में पर्याप्त प्रोटीन और फाइबर नहीं लिया है, तो शाम की यह क्रेविंग और भी घातक हो सकती है।

मोटापे का चक्र: कैसे फंसते हैं आप?
जब हम शाम को अनहेल्दी और पैकेज्ड फूड खाते हैं, तो शरीर में कैलोरी की मात्रा अचानक बढ़ जाती है। शाम के समय शारीरिक गतिविधियां कम होने के कारण ये कैलोरी बर्न नहीं हो पातीं और सीधे फैट के रूप में जमा होने लगती हैं। मीठा खाने से इंसुलिन लेवल तेजी से बढ़ता है और फिर गिर जाता है, जिससे आपको थोड़ी देर बाद फिर से भूख लगने लगती है। यह एक ऐसा चक्र है जो धीरे-धीरे आपको मोटापे और डायबिटीज की ओर धकेलता है।

क्रेविंग को मात देने के स्मार्ट तरीके
एक्सपर्ट्स का कहना है कि क्रेविंग से लड़ने के बजाय उसे समझदारी से मैनेज करें:
- प्रोटीन और फाइबर का मेल: शाम के नाश्ते में भुना हुआ चना, मखाना, अंकुरित अनाज (स्प्राउट्स) या कोई फल शामिल करें।
- पानी का सेवन: कई बार प्यास को हम भूख समझ लेते हैं, इसलिए क्रेविंग होने पर पहले एक गिलास पानी पिएं।
- दोपहर का भोजन: सुनिश्चित करें कि आपका लंच भारी और पोषक तत्वों से भरपूर हो, ताकि शाम तक पेट भरा महसूस हो।
याद रखें, वजन घटाने का मतलब भूखा रहना नहीं, बल्कि सही समय पर सही चीज खाना है। अपनी शाम की आदतों में छोटा सा बदलाव आपको बड़े स्वास्थ्य लाभ दे सकता है।











