शांति वार्ता के बीच अमेरिका की ईरान में सैन्य कार्रवाई, मिसाइल ठिकानों और नौकाओं पर हमला

शांति वार्ता के बीच अमेरिका की ईरान में सैन्य कार्रवाई, मिसाइल ठिकानों और नौकाओं पर हमला

Johar News Times
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ट्रंप ने परमाणु कार्यक्रम को लेकर दी कड़ी चेतावनी, मध्य-पूर्व में बढ़ा तनाव

वॉशिंगटन/तेहरान : अमेरिका और ईरान के बीच जारी शांति वार्ता के बीच दक्षिणी ईरान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने एक बार फिर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा दिया है। अमेरिकी सेना ने आत्मरक्षा का हवाला देते हुए दक्षिणी ईरान में कई ठिकानों पर हमला किया। दावा किया गया है कि इस कार्रवाई में उन स्थानों को निशाना बनाया गया, जहां से मिसाइल लॉन्च किए जाने की आशंका थी। साथ ही समुद्री क्षेत्र में सक्रिय ईरानी नौकाओं पर भी हमला किया गया, जो कथित तौर पर बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी में थीं।अमेरिकी सेंटकॉम (सेंट्रल कमांड) के प्रवक्ता टिम हॉकिन्स ने फॉक्स न्यूज को बताया कि यह कार्रवाई अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई। उन्होंने कहा कि मौजूदा युद्धविराम के दौरान अमेरिकी सेना ने संयम बरता, लेकिन जवानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सैन्य कदम उठाना जरूरी हो गया था।

मिसाइल लॉन्च साइट्स को बनाया गया निशाना
जानकारी के अनुसार अमेरिकी सेना ने उन संभावित लॉन्च साइट्स पर हमला किया, जहां से मिसाइल दागे जाने की आशंका जताई जा रही थी। इसके अलावा समुद्री क्षेत्र में मौजूद उन ईरानी नौकाओं को भी निशाना बनाया गया, जिन पर बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी का आरोप लगाया गया है। हालांकि ईरान की ओर से इस कार्रवाई को लेकर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

परमाणु कार्यक्रम पर ट्रंप का सख्त संदेश
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। मेमोरियल डे के अवसर पर दिए गए संबोधन में ट्रंप ने दोहराया कि ईरान को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा। ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ईरान के संवर्धित यूरेनियम को या तो तुरंत अमेरिका को सौंप दिया जाए ताकि उसे नष्ट किया जा सके, या फिर अंतरराष्ट्रीय निगरानी में उसे किसी स्वीकार्य स्थान पर खत्म किया जाए।

मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ने की आशंका
अमेरिका की सैन्य कार्रवाई और ट्रंप के सख्त बयान के बाद मध्य-पूर्व में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि शांति वार्ता के दौरान हुई यह सैन्य कार्रवाई दोनों देशों के रिश्तों पर गहरा असर डाल सकती है और क्षेत्रीय अस्थिरता को और बढ़ा सकती है।

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