जमशेदपुर के बागबेड़ा क्षेत्र में पेयजल संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। पिछले 11 वर्षों से अधूरी पड़ी बागबेड़ा ग्रामीण जलापूर्ति योजना के कारण करीब 2 लाख 25 हजार लोगों को आज भी पानी के लिए भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद योजना धरातल पर पूरी तरह लागू नहीं हो सकी है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से मिला प्रतिनिधिमंडल
इस गंभीर मुद्दे को लेकर भाजपा नेता सुबोध झा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने योजना को जल्द पूरा कराने और इस मामले में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग उठाई।
793 बार हो चुका आंदोलन
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि बागबेड़ा महानगर विकास समिति द्वारा अब तक 793 बार आंदोलन किए जा चुके हैं। इनमें विधानसभा और राजभवन का घेराव, साथ ही रांची और नई दिल्ली तक पदयात्रा शामिल है। इसके बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।
करोड़ों खर्च, फिर भी अधूरा प्रोजेक्ट
सुबोध झा ने आरोप लगाया कि इस योजना के लिए केंद्र और राज्य सरकार के साथ-साथ विश्व बैंक के माध्यम से भी फंड मिला, लेकिन काम पूरा नहीं हुआ।
- पहले चरण में 237 करोड़ रुपये खर्च किए गए
- बाद में जल जीवन मिशन के तहत 50 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भी मिली
इसके बावजूद योजना अधूरी है और लोगों को पानी नहीं मिल पा रहा।
हाईकोर्ट में दायर है जनहित याचिका
इस मामले को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दायर की गई है। जानकारी के अनुसार, इस योजना से जुड़े 21 पंचायतों के 113 गांव और रेलवे क्षेत्र की 33 बस्तियां अब भी पानी के संकट से जूझ रही हैं।
भाजपा का आंदोलन तेज करने का ऐलान
प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विधायक नवीन जायसवाल को निर्देश दिया है कि वे स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपें और विधानसभा में इस मुद्दे को उठाएं। साथ ही उन्होंने साफ किया कि पानी और बिजली की समस्या को लेकर भाजपा राज्यभर में आंदोलन करेगी।
इसी क्रम में 7 मई 2026 को जमशेदपुर में उपायुक्त कार्यालय के समक्ष पानी और बिजली की समस्या को लेकर बड़ा घेराव-प्रदर्शन करने की घोषणा की गई है।
लगातार वर्षों से पानी की समस्या झेल रहे स्थानीय लोगों में अब नाराजगी बढ़ती जा रही है। सवाल उठ रहे हैं कि जब करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं, तो आखिर अब तक योजना पूरी क्यों नहीं हो पाई। बागबेड़ा जलापूर्ति योजना अब सरकारी कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर बड़ा सवाल बनती जा रही है।











