झारखंड में जमीन नामांतरण घोटाला: बिना जांच कार्रवाई करने पर पूर्व सीओ पर गिरी गाज

झारखंड में जमीन नामांतरण घोटाला: बिना जांच कार्रवाई करने पर पूर्व सीओ पर गिरी गाज

Johar News Times
3 Min Read

झारखंड में जमीन नामांतरण से जुड़े एक गंभीर मामले में प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। धालभूमगढ़ (पूर्वी सिंहभूम) के तत्कालीन अंचल अधिकारी हरिश्चंद्र मुंडा के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया गया है। मुख्यमंत्री की सहमति के बाद कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक संकल्प जारी किया है, जिससे पूरे प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए विभागीय जांच का दायित्व सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी संजय सिन्हा को सौंपा गया है। वहीं, धालभूमगढ़ के भूमि सुधार उप समाहर्ता को उपस्थापन पदाधिकारी नियुक्त किया गया है, जो जांच प्रक्रिया में आवश्यक दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत करेंगे।

- Advertisement -
Ad image

आरोप है कि हरिश्चंद्र मुंडा ने मौजा जुनबनी की विभिन्न खातों से जुड़ी लगभग 15.98 एकड़ भूमि का नामांतरण बिना दखल-कब्जा सत्यापन और स्थल जांच किए कर दिया। यह नामांतरण आवेदक प्रकाश चंद्र मुखर्जी के पक्ष में किया गया था। जबकि संबंधित भूमि के एक हिस्से—खाता संख्या 143, प्लॉट संख्या 749—को पहले ही भू-हदबंदी अधिनियम के तहत विभिन्न रैयतों के बीच आवंटित किया जा चुका था। ऐसे में बिना जांच के किया गया यह नामांतरण नियमों के उल्लंघन का स्पष्ट मामला माना जा रहा है।

इस पूरे मामले की जांच जमशेदपुर के उपायुक्त द्वारा कराई गई थी, जिसके बाद 8 नवंबर 2025 को आरोप पत्र गठित कर विभाग को कार्रवाई की अनुशंसा भेजी गई। जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए, जिसके आधार पर अब औपचारिक विभागीय कार्यवाही शुरू की गई है।

सरकार ने झारखंड सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2016 के नियम-17 के तहत कार्रवाई का आदेश दिया है। पूर्व सीओ हरिश्चंद्र मुंडा को निर्देश दिया गया है कि वे आदेश प्राप्ति के 15 दिनों के भीतर अपना लिखित पक्ष प्रस्तुत करें। वहीं, जांच पदाधिकारी को 105 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है।

इस मामले में अन्य संबंधित कर्मियों के खिलाफ भी अलग से कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। यह पूरा घटनाक्रम प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है, जिससे आने वाले समय में जमीन से जुड़े मामलों में सख्ती और सतर्कता बढ़ने की उम्मीद की जा रही है।

- Advertisement -
Ad image
Share This Article