चाईबासा के सारंडा जंगल में सुरक्षा बलों पर प्राकृतिक और नक्सली दोनों खतरे भारी,
चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम):
झारखंड के घने सारंडा जंगल में चल रहे नक्सल विरोधी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों को सिर्फ नक्सलियों से ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक खतरों से भी जूझना पड़ रहा है। ताजा घटना में मधुमक्खियों के झुंड ने हमला कर दिया, जिसमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के चार जवान घायल हो गए। सभी घायल जवानों को तत्काल मनोहरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है और हालत स्थिर बताई जा रही है।
प्राकृतिक चुनौतियां बनी बड़ी चिंता
सारंडा जैसे घने और दुर्गम जंगल में अभियान चला रहे जवानों के सामने मलेरिया का खतरा लगातार बना हुआ है। हाल ही में ऑपरेशन में शामिल एक जवान की मलेरिया से मौत हो चुकी है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। जंगल में मच्छरों की अधिकता और मौसम की अनिश्चितता इस खतरे को और गंभीर बना रही है।
IED और घात का भी खतरा बरकरार
सुरक्षा बलों को नक्सलियों द्वारा बिछाए गए इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) और घात लगाकर किए जाने वाले हमलों का भी लगातार सामना करना पड़ रहा है। घने जंगल, सीमित संचार व्यवस्था और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां ऑपरेशन को और चुनौतीपूर्ण बना देती हैं।
मुस्तैदी से डटे हैं जवान
इन सभी खतरों के बावजूद CRPF और अन्य सुरक्षा बलों के जवान पूरी सतर्कता और साहस के साथ अभियान में जुटे हुए हैं। सुरक्षा एजेंसियां अब ऑपरेशन के दौरान स्वास्थ्य सुरक्षा, मलेरिया रोकथाम और जंगल में रहने की विशेष तैयारियों पर भी जोर दे रही हैं, ताकि जवानों को हर मोर्चे पर सुरक्षित रखा जा सके।









