झारखंड में माओवादी ऑपरेशन : CRPF का ड्रोन ‘नेत्रा’ बना बड़ा हथियार, सटीक लोकेशन से मिल रही लगातार सफलता

Johar News Times
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झारखंड में माओवादियों के खिलाफ चल रहे अभियानों में सुरक्षा बलों को मिल रही सफलता के पीछे आधुनिक तकनीक की अहम भूमिका सामने आई है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) का हाईटेक ड्रोन ‘नेत्रा’ इस लड़ाई में गेम चेंजर साबित हो रहा है।

हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे से लैस यह ड्रोन घने जंगलों में छिपे माओवादियों की हर गतिविधि पर नजर रखता है, जिससे उनके बच निकलने की संभावना काफी कम हो गई है।

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बड़े ऑपरेशनों में ड्रोन की अहम भूमिका

बोकारो और हजारीबाग के घने जंगलों से लेकर पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा क्षेत्र तक हुए कई बड़े अभियानों में ‘नेत्रा’ ड्रोन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसी तकनीक की मदद से हाल के वर्षों में कई बड़े इनामी माओवादी मारे गए हैं।

21 अप्रैल 2025 को बोकारो के ललपनिया स्थित लुगू पहाड़ी में एक करोड़ के इनामी प्रयाग मांझी उर्फ विवेक समेत 8 माओवादी ढेर किए गए।
16 जुलाई 2025 को गोमिया के बिरहोरडेरा जंगल में 5 लाख के इनामी कुंवर मांझी मारा गया, हालांकि इस दौरान सीआरपीएफ जवान परनेश्वर कोच शहीद हो गए।
15 सितंबर 2025 को हजारीबाग के पनतीतरी जंगल में एक करोड़ के इनामी सहदेव सोरेन सहित कई माओवादी मारे गए।
22 जनवरी 2026 को सारंडा में ऑपरेशन मेगाबुरू के तहत एक करोड़ के इनामी अनल दा समेत 17 माओवादी ढेर किए गए।
17 अप्रैल 2026 को केरेडारी में ऑपरेशन कोतीनीर के दौरान 15 लाख के इनामी सहदेव महतो उर्फ अनुज महतो समेत 4 माओवादी मारे गए।

5 किलोमीटर तक निगरानी, हर गतिविधि पर नजर

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‘नेत्रा’ ड्रोन लगभग 5 किलोमीटर तक क्षेत्र में निगरानी कर सकता है। यह लगातार उड़ान भरकर इलाके की मॉनिटरिंग करता है और बेहद छोटी हलचल को भी कैमरे में कैद कर लेता है। घने जंगलों में भी यह मानव गतिविधियों का पता लगाने में सक्षम है।

यह ड्रोन संदिग्ध गतिविधि मिलने पर उसकी सटीक लोकेशन (लॉन्गीट्यूड और लेटीट्यूड) सुरक्षा बलों को भेजता है, जिससे घेराबंदी और कार्रवाई आसान हो जाती है।

निगरानी और कैंप सुरक्षा में भी उपयोग

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‘नेत्रा’ का उपयोग केवल माओवादियों की खोज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा कैंपों के बीच भी निगरानी करता है। यदि दो कैंपों के बीच कोई संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि दिखती है, तो यह तुरंत अलर्ट जारी करता है।

‘स्विच’ ड्रोन भी बना मददगार

इसके अलावा सुरक्षा बलों के पास ‘स्विच’ नाम का एक और उन्नत ड्रोन है, जो बिना आवाज के कम ऊंचाई पर उड़ान भरता है। यह दुश्मन के ठिकानों की पहचान में बेहद प्रभावी साबित हो रहा है और माओवादी प्रभावित इलाकों में ऑपरेशन को और मजबूत बना रहा है।

ड्रोन तकनीक से बदला ऑपरेशन का स्वरूप

CRPF के आईजी साकेत कुमार सिंह के अनुसार, माओवादियों के खिलाफ अभियानों में ड्रोन तकनीक बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसकी मदद से ऑपरेशन अधिक सटीक, तेज और प्रभावी हो गए हैं, जिससे सुरक्षा बलों को लगातार सफलता मिल रही है।

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