भारतीय थाली में छिपे हैं तीन बड़े खतरे, खराब डाइट से देश में हर साल 11 लाख से ज्यादा मौतें

Johar News Times
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स्वास्थ्य को लेकर हाल ही में हुए एक बड़े वैश्विक अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 11.1 लाख लोगों की मृत्यु का मुख्य कारण उनका गलत खान-पान है। ‘द इनोवेशन न्यूट्रिशन जर्नल’ में प्रकाशित इस शोध ने स्पष्ट किया है कि हमारी रसोई में मौजूद तीन आम आदतें दिल की बीमारियों और स्ट्रोक का सबसे बड़ा कारण बन रही हैं।


मौत का कारण बनने वाली तीन मुख्य कमियां

बीजिंग चिल्ड्रन हॉस्पिटल के शोधकर्ताओं ने 33 वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद ‘टॉप 3’ जोखिम कारकों की पहचान की है:

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  • नमक का अधिक सेवन: भोजन में सोडियम की अधिक मात्रा उच्च रक्तचाप और हृदय रोगों को सीधे तौर पर बढ़ावा दे रही है।
  • फलों का कम सेवन: आहार में फलों की अनुपस्थिति शरीर को जरूरी एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन्स से वंचित रख रही है।
  • साबुत अनाज की अनुपस्थिति: रिफाइंड अनाज पर निर्भरता ने इस्कीमिक हृदय रोग के खतरे को कई गुना बढ़ा दिया है।

वैश्विक आंकड़ों में भारत की स्थिति चिंताजनक

अध्ययन के मुताबिक, वर्ष 2023 में आहार संबंधी गड़बड़ियों के कारण दुनिया भर में हृदय रोग से 59.1 लाख मौतें हुईं। इस सूची में चीन 13.6 लाख मौतों के साथ पहले स्थान पर है, जबकि भारत 11.1 लाख मौतों के साथ दूसरे स्थान पर बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह आंकड़े डराने वाले हैं क्योंकि चिकित्सा सुविधाओं में सुधार के बावजूद मौतों की कुल संख्या कम होने के बजाय बढ़ रही है।


विशेषज्ञों की चेतावनी: उम्रदराज आबादी पर बढ़ता संकट

शोध के प्रमुख लेखक गुओशुआंग फेंग ने कहा कि डाइट की गुणवत्ता में सुधार करना वैश्विक हृदय रोग रोकथाम का केंद्रीय स्तंभ होना चाहिए। उन्होंने बताया कि भारत जैसे देशों में जहाँ जनसंख्या की औसत आयु बढ़ रही है, वहां लोग उच्च नमक और कम पोषक तत्वों वाले आहार के प्रति अधिक संवेदनशील होते जा रहे हैं।

विशेष रूप से निम्न और मध्यम आय वाले क्षेत्रों में फलों की कमी एक गंभीर संकट के रूप में उभरी है, जो सीधे तौर पर स्ट्रोक और हार्ट अटैक का कारण बन रही है।


क्या है बचाव का रास्ता?

शोधकर्ताओं का निष्कर्ष है कि केवल दवाइयों के भरोसे हृदय रोगों से नहीं जीता जा सकता। इसके लिए व्यक्तिगत स्तर पर आहार में बदलाव अनिवार्य है। नमक की मात्रा घटाना, दैनिक आहार में पर्याप्त फल शामिल करना और मैदे जैसे रिफाइंड उत्पादों की जगह साबुत अनाज (जैसे बाजरा, रागी और चोकर युक्त आटा) को प्राथमिकता देना ही जीवन बचाने का एकमात्र तरीका है।

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