स्वर्णरेखा नदी में ‘इनटेक वेल पंप हाउस’ की साफ-सफाई: जाने जमीनी हकीकत का विश्लेषण

Johar News Times
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चांडिल/सरायकेला: हाल के दिनों में स्वर्णरेखा नदी के मानीकुई पुल के समीप ‘इनटेक वेल पंप हाउस’ में चल रहे सफाई कार्य को लेकर इसे ‘अवैध बालू उठाव’ के चश्मे से देखने का प्रयास किया गया है। हालांकि, जब इस विषय की गहराई से पड़ताल की गई और विभागीय दस्तावेजों व ‘आधुनिक पावर प्लांट’ के अधिकारियों से बात की गई, तो तस्वीर इसके बिल्कुल उलट और जनहित से जुड़ी नजर आई।

क्यों जरूरी है सफाई कार्य?

भीषण गर्मी के दस्तक देते ही स्वर्णरेखा नदी का जलस्तर स्वाभाविक रूप से नीचे चला जाता है। ‘आधुनिक पावर प्लांट’, जो राज्य सरकार को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, उसके लिए इनटेक वेल पंप हाउस’ तक पानी का पहुंचना अनिवार्य है।

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  • डबल इंजन यूनिट: ठंड की तुलना में गर्मी में बिजली की मांग बढ़ जाती है, जिसके लिए प्लांट की दोनों यूनिट्स को पूरी क्षमता से चलाना पड़ता है।
  • नियमित प्रक्रिया: पंप हाउस के पास जमा बालू को हटाकर नदी को गहरा करना एक तकनीकी आवश्यकता है, ताकि पानी का जमाव हो सके और पंप सुरक्षित रूप से पानी खींच सकें।

कुछ हलकों में इसे बालू का अवैध खेल बताया गया, लेकिन वास्तविकता यह है कि कंपनी द्वारा बालू को नदी से बाहर नहीं बेचा जा रहा। पंप हाउस को गहरा करने के लिए निकाली गई बालू को अस्थायी रूप से किनारे रखा जाता है और पुनः नदी के ही दूसरे हिस्सों में डाल दिया जाता है। यह एक मानक रखरखाव प्रक्रिया (SOP) है, जो हर साल अपनाई जाती है।

महत्वपूर्ण तथ्य: इस कार्य को शुरू करने से पहले कंपनी द्वारा विधिवत रूप से जिला उपायुक्त (DC) और जिला खनन पदाधिकारी (DMO) को लिखित सूचना दी गई है। अतः इसे ‘अवैध’ कहना केवल सूचना के अभाव को दर्शाता है।

जिम्मेदारी और जवाबदेही का उदाहरण

हैरानी की बात यह है कि नदी के संरक्षण और सफाई का प्राथमिक कार्य ‘चांडिल सुवर्णरेखा परियोजना’ का है। इसके बावजूद, आधुनिक पावर प्लांट अपनी सामाजिक और व्यावसायिक जिम्मेदारी समझते हुए लाखों रुपये खर्च कर खुद इस सफाई अभियान को अंजाम दे रहा है।

  • राजस्व का योगदान: कंपनी नदी जल के उपयोग के बदले राज्य सरकार को भारी-भरकम टैक्स देती है। पिछले माह ही 1 करोड़ 37 लाख रुपये का भुगतान जल कर (Water Tax) के रूप में किया गया है।
  • पूरे साल की अगर बात करे तो 10 करोड़ से अधिक भुगतान जल कर (Water Tax) के रूप में किया जाता है।

निष्कर्ष

स्थानीय प्रशासन और विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि मशीनों का उपयोग हमेशा खनन के लिए नहीं, बल्कि नदी के स्वास्थ्य और जल निकासी व्यवस्था को सुधारने के लिए भी किया जाता है। आधुनिक पावर प्लांट के अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे अपुष्ट सूचनाओं या अफवाहों पर ध्यान न दें।

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सच्चाई यही है कि यह सफाई कार्य किसी ‘निजी लाभ’ के लिए नहीं, बल्कि राज्य की बिजली व्यवस्था को सुचारु रखने और गर्मी में जनता को लोड शेडिंग से बचाने के लिए किया जा रहा एक अनिवार्य प्रयास है।

आधुनिक पावर प्लांट प्रबंधन ने लोगों से अपील की है कि अपुष्ट सूचनाओं पर ध्यान न दें और किसी भी जानकारी के लिए अधिकृत विभागीय स्रोतों पर ही भरोसा करें। फिलहाल, जिस कार्य को लेकर विभिन्न तरह की चर्चाएं हो रही थीं, वह वास्तव में बिजली उत्पादन और जलापूर्ति से जुड़ा नियमित तकनीकी रखरखाव कार्य बताया जा रहा है।

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