घाटशिला: केंद्र सरकार ने सरकारी कंपनी हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड को लेकर बड़ा रणनीतिक फैसला लिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल कंपनी में हिस्सेदारी बेचने (डिसइन्वेस्टमेंट) की कोई योजना नहीं है। इसके बजाय अब फोकस कंपनी के विस्तार और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर रहेगा।
खनन मंत्रालय द्वारा हाल ही में कंपनी की उत्पादन क्षमता को लेकर समीक्षा की गई, जिसमें आने वाले वर्षों के लिए एक व्यापक एक्सपेंशन रोडमैप तैयार किया गया है। सरकार चाहती है कि हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड देश में तेजी से बढ़ती कॉपर की मांग को पूरा करे और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य में अहम भूमिका निभाए।
डिसइन्वेस्टमेंट पर ब्रेक, नियंत्रण बनाए रखने की रणनीति
सरकार के इस फैसले से यह साफ संकेत मिला है कि वह रणनीतिक खनन क्षेत्र में अपनी पकड़ बनाए रखना चाहती है। विशेषज्ञों के अनुसार, निजी कंपनियों के संभावित एकाधिकार को रोकने और संसाधनों पर सरकारी नियंत्रण बनाए रखने के लिहाज से यह कदम महत्वपूर्ण है।
कॉपर की बढ़ती मांग बनी वजह
इलेक्ट्रिक वाहन, बिजली उत्पादन और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में कॉपर की बढ़ती जरूरत को देखते हुए सरकार ने यह रुख अपनाया है। आने वाले समय में कॉपर की मांग और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है, जिसे पूरा करने के लिए उत्पादन बढ़ाना जरूरी माना जा रहा है।
2030 तक उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य
सरकार ने एचसीएल की उत्पादन क्षमता को वर्ष 2030 तक करीब 12.2 मिलियन टन प्रति वर्ष तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत बंद पड़ी खदानों को फिर से चालू किया जाएगा, नए प्रोजेक्ट्स शुरू होंगे और पूंजी निवेश (कैपेक्स) में भी वृद्धि की जाएगी।
‘बेचने’ से ‘बढ़ाने’ की ओर नीति बदलाव
पहले जहां कंपनी में हिस्सेदारी बेचने की चर्चा थी, वहीं अब सरकार ने अपनी नीति में बदलाव करते हुए ‘डिसइन्वेस्टमेंट’ के बजाय ‘एक्सपेंशन’ पर जोर दिया है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह फैसला न केवल हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड को मजबूत करेगा, बल्कि देश को धातु एवं खनन क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी मील का पत्थर साबित हो सकता है।










