सरायकेला: कांड्रा थाना क्षेत्र में स्वर्णरेखा नदी से अवैध बालू उत्खनन का काला खेल एक बार फिर बेखौफ अंदाज में शुरू हो गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस बार माफियाओं ने सीधे मनीकुई पुल के नीचे ही मोर्चा खोल दिया है, जहाँ दिन के उजाले में चार-चार पोकलेन मशीनों से बालू का अवैध उठाव किया जा रहा है।
पुल की सुरक्षा पर मंडराया बड़ा खतरा
नियमों के अनुसार, किसी भी पुल के 500 मीटर के दायरे में खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए पुल के पिलरों के पास से बालू निकाली जा रही है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि:
- नींव हो सकती है कमजोर: पिलरों के आसपास से अत्यधिक बालू हटने से पुल की नींव धंस सकती है।
- बड़े हादसे की आशंका: भविष्य में पुल के क्षतिग्रस्त होने या किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
- पर्यावरणीय असंतुलन: भारी मशीनों के उपयोग से नदी की धारा और प्राकृतिक संरचना बदल रही है।
प्रशासनिक मौन पर उठ रहे सवाल
इतने बड़े पैमाने पर भारी मशीनों (पोकलेन) का इस्तेमाल और दिन-रात सैकड़ों हाइवा-ट्रैक्टरों की आवाजाही ने स्थानीय प्रशासन और खनन विभाग की भूमिका पर संदेह पैदा कर दिया है।
- मिलीभगत का आरोप: स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह अवैध कारोबार बिना प्रशासनिक संरक्षण के संभव नहीं है।
- सूचना के बावजूद कार्रवाई नहीं: दिनदहाड़े हो रहे इस खेल पर कांड्रा थाना और खनन विभाग का अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
जनता की मांग: माफियाओं पर हो नकेल
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों का कहना है कि न केवल खनन पर रोक लगाई जाए, बल्कि अवैध बालू माफियाओं और इसमें संलिप्त अधिकारियों पर भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, मनीकुई पुल की मजबूती की तकनीकी जांच सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में कोई जनहानि न हो।
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