संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र के दूसरे दिन गुरुवार (16 अप्रैल 2026) को लोकसभा में महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़ा संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पेश किया गया। यह विधेयक वोटिंग के बाद पेश हुआ, जिसमें 251 सदस्यों ने समर्थन किया, जबकि 185 सदस्यों ने विरोध में मतदान किया। इसके साथ ही परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक भी पेश किए गए। इन विधेयकों पर अंतिम मतदान शुक्रवार (17 अप्रैल 2026) शाम 4 बजे किया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चर्चा के दौरान विपक्ष से अपील की कि महिला आरक्षण लागू करने से जुड़े इन विधेयकों को राजनीतिक रंग न दिया जाए। उन्होंने आश्वस्त किया कि परिसीमन के दौरान किसी भी राज्य के साथ अन्याय नहीं होगा और विपक्ष को इस पहल का श्रेय लेने के लिए “ब्लैंक चेक” तक देने की बात कही।
प्रस्तावित मसौदे के अनुसार, परिसीमन के बाद लोकसभा की सीटें मौजूदा 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 तक की जा सकती हैं। साथ ही राज्य विधानसभाओं का विस्तार भी किया जाएगा, ताकि महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू किया जा सके। हालांकि, INDIA गठबंधन के दलों ने परिसीमन प्रावधानों का विरोध करने का निर्णय लिया है, जबकि उन्होंने महिला आरक्षण के सिद्धांत का समर्थन किया है।

अमित शाह ने खारिज किया दक्षिण की सीट घटने का दावा
गृह मंत्री अमित शाह ने बहस में कहा कि यह कहना गलत है कि परिसीमन से दक्षिणी राज्यों की ताकत घटेगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कर्नाटक की लोकसभा सीटें 28 से बढ़कर 42 हो जाएंगी, जबकि प्रतिशत लगभग समान रहेगा। वहीं तमिलनाडु की सीटें 59 तक बढ़ेंगी और उनका प्रतिनिधित्व भी बढ़ेगा।
प्रियंका गांधी ने उठाया ओबीसी प्रतिनिधित्व का मुद्दा
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सरकार पर 2011 की जनगणना के आधार पर विधेयक लाने का आरोप लगाया और कहा कि इससे ओबीसी समुदाय के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सरकार नई जनगणना से बचना चाहती है, क्योंकि उससे वास्तविक आंकड़े सामने आएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने पहले ही महिला आरक्षण का समर्थन किया था और 2019 तक इसे लागू करने की मांग की थी।
परिसीमन पर ‘जेरिमैंडरिंग’ की आशंका
जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने कहा कि परिसीमन से विभिन्न क्षेत्रों में ‘जेरिमैंडरिंग’ हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था पहले से ही उत्तरी राज्यों के पक्ष में झुकी हुई है, जिससे कुछ राज्यों का प्रभाव अधिक हो सकता है।
आईयूएमएल और सपा ने भी उठाए सवाल
आईयूएमएल सांसद ई.टी. मोहम्मद बशीर ने महिला आरक्षण का समर्थन करते हुए परिसीमन विधेयक का विरोध किया। उन्होंने सवाल उठाया कि दोनों को आपस में क्यों जोड़ा जा रहा है। वहीं समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने मांग की कि 543 सीटों पर तत्काल 33% महिला आरक्षण लागू किया जाए और इसे 2029 तक टालने की जरूरत नहीं है।
संसद में जारी इस बहस ने महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे अहम मुद्दों पर राजनीतिक मतभेदों को उजागर कर दिया है। अब सभी की नजरें शुक्रवार को होने वाली अंतिम वोटिंग पर टिकी हैं।


















