बाघ-हाथी कॉरिडोर से हटेगी रेलवे लाइन, पलामू टाइगर रिजर्व में 11 किमी ट्रैक 14 किमी तक होगा डायवर्ट

बाघ-हाथी कॉरिडोर से हटेगी रेलवे लाइन, पलामू टाइगर रिजर्व में 11 किमी ट्रैक 14 किमी तक होगा डायवर्ट

Johar News Times
3 Min Read

झारखंड में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में बड़ा फैसला लेते हुए पलामू टाइगर रिजर्व के कोर एरिया से गुजर रही रेलवे लाइन को डायवर्ट करने की मंजूरी दे दी गई है। यह कदम बाघों और हाथियों के महत्वपूर्ण कॉरिडोर को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।

लंबे समय से चल रहे विवाद के बाद तीसरी रेल लाइन बिछाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया है। इसके बजाय मौजूदा रेल ट्रैक को ही कोर एरिया से बाहर शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया है।

- Advertisement -
Ad image

तीसरी लाइन का प्रस्ताव खारिज
सोननगर से पतरातू तक प्रस्तावित तीसरी रेल लाइन परियोजना कई हिस्सों में आगे बढ़ चुकी थी, लेकिन पलामू टाइगर रिजर्व का कोर क्षेत्र सबसे बड़ी बाधा बना हुआ था। यह इलाका बाघों और हाथियों की आवाजाही का प्रमुख मार्ग है, जहां किसी भी निर्माण कार्य से वन्यजीवों पर खतरा मंडरा सकता था।

वर्ष 2021 में रेलवे विकास निगम ने तीसरी लाइन के लिए एनओसी मांगी थी, जिसे पीटीआर प्रबंधन ने पर्यावरणीय कारणों से अस्वीकार कर दिया। मामला आगे बढ़ते हुए राज्य वन्यजीव बोर्ड और फिर नेशनल वाइल्डलाइफ बोर्ड के पास पहुंचा, जहां विस्तृत विचार-विमर्श के बाद तीसरी लाइन के प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया।

नई योजना: ट्रैक होगा लंबा लेकिन सुरक्षित
नई योजना के तहत लातेहार जिले में छिपादोहर और हेहेगड़ा रेलवे स्टेशन के बीच लगभग 11 किलोमीटर लंबे ट्रैक को डायवर्ट किया जाएगा, जो अब करीब 14 किलोमीटर का हो जाएगा। नया ट्रैक केड गांव होते हुए गुजरेगा और इसका अधिकांश हिस्सा रिजर्व क्षेत्र के बाहर रहेगा।

हालांकि, कुछ सौ मीटर ट्रैक रिजर्व क्षेत्र से होकर गुजरेगा, जहां वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए टनल का निर्माण किया जाएगा।

- Advertisement -
Ad image

सर्वे पूरा, जमीन अधिग्रहण शुरू
इस परियोजना के लिए रेलवे विकास निगम और पीटीआर प्रशासन द्वारा संयुक्त रूप से सर्वेक्षण कार्य पूरा कर लिया गया है। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की टीम ने भी पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन किया है।

फिलहाल जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसमें जिला प्रशासन सक्रिय भूमिका निभा रहा है। प्रभावित गांवों के लोगों से सुझाव लेकर उनकी मांगों पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि विकास और स्थानीय हितों के बीच संतुलन बनाया जा सके।

वन्यजीवों को मिलेगा सुरक्षित मार्ग
पीटीआर के उपनिदेशक प्रजेशकांत जेना के अनुसार, रेल लाइन का यह डायवर्जन बाघ और हाथी कॉरिडोर के लिए बेहद लाभकारी साबित होगा। इससे वन्यजीवों की आवाजाही अधिक सुरक्षित हो सकेगी और मानव-वन्यजीव टकराव की आशंका भी कम होगी।

- Advertisement -
Ad image
Share This Article