
टाटा स्टील अब पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ब्लास्ट फर्नेस (बीएफ) स्लैग और राख से 235 प्रकार की भवन निर्माण सामग्री तैयार कर रही है। कंपनी की अनुषंगी इकाई इंडस्ट्रियल बाय-प्रोडक्ट मटेरियल डिवीजन (आईबीएमडी) इस पहल को आगे बढ़ा रही है।
गुरुवार को सेंटर फॉर एक्सीलेंस सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में आईबीएमडी के एक्जीक्यूटिव इंचार्ज दीपांकर दासगुप्ता ने बताया कि स्टील उत्पादन से निकलने वाले स्लैग को अब रेत के विकल्प के रूप में उपयोग में लाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मानगो में बन रहे फ्लाईओवर के निर्माण में हर महीने करीब 2000 टन ‘टाटा एग्रेटो’ की आपूर्ति की जा रही है।
सतत विकास की दिशा में पहल
दासगुप्ता ने जानकारी दी कि एक टन क्रूड स्टील के उत्पादन पर 1.5 से 1.75 टन स्लैग और करीब 2.2 टन कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होता है। ऐसे में इन उप-उत्पादों का 100 प्रतिशत उपयोग करना समय की जरूरत है। टाटा स्टील इन्हीं अवांछित पदार्थों को उपयोगी उत्पादों में बदल रही है।
कंपनी सड़क निर्माण के लिए ‘टाटा एग्रेटो’, फ्लाई ऐश ईंटें और ‘टाटा निर्माण’ जैसे उत्पाद बना रही है, जो पारंपरिक मिट्टी की ईंटों का बेहतर विकल्प माने जा रहे हैं। इन उत्पादों के उपयोग से निर्माण लागत में करीब 15 प्रतिशत तक कमी आने की संभावना है।
सीमेंट कंपनियों को बड़ी आपूर्ति
टाटा स्टील हर वर्ष लगभग 8 मिलियन टन स्लैग देश की प्रमुख सीमेंट कंपनियों जैसे एसीसी लिमिटेड, न्यूवोको विस्टास कॉर्प, रैमको सीमेंट और डालमिया भारत को कच्चे माल के रूप में उपलब्ध करा रही है। इससे कार्बन उत्सर्जन कम करने में भी मदद मिल रही है।
वर्तमान में जमशेदपुर, कलिंगनगर और मीरामंडली प्लांट से निकलने वाले करीब 18 मिलियन टन स्लैग का उपयोग बाय-प्रोडक्ट के रूप में किया जा रहा है।
आईएसआई प्रमाणन के बाद बाजार में उतरेंगे उत्पाद
कंपनी इन उत्पादों को बाजार में लाने से पहले सरकार से आईएसआई प्रमाणन का इंतजार कर रही है। दासगुप्ता के अनुसार, इसके लिए लंबे समय से रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर काम किया जा रहा है और सभी उत्पादों का पेटेंट भी कराया जा रहा है।
खड़गपुर में लगेगा नया प्लांट
आईबीएमडी खड़गपुर में टाटा मेटालिक्स के साथ मिलकर नया प्लांट स्थापित करने जा रही है। यहां ग्राउंड ग्रेनुलेटेड ब्लास्ट फर्नेस स्लैग (जीजीबीएस) का उत्पादन होगा, जिसे हल्दिया के रास्ते पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में भेजा जाएगा। इस उत्पाद का उपयोग सीमेंट और कंक्रीट को अधिक मजबूत बनाने में किया जाएगा।
रेलवे परियोजनाओं में भी संभावित उपयोग
दासगुप्ता ने बताया कि रेलवे में नई लाइन बिछाने के लिए ‘टाटा एग्रेटो’ के उपयोग को लेकर भारतीय रेलवे से बातचीत चल रही है। इसके लिए आईआईटी भुवनेश्वर और रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गेनाइजेशन के साथ शोध और तकनीकी चर्चा जारी है।
उन्होंने यह भी बताया कि इस तकनीक का उपयोग पहले ही बोगीबील पुल के निर्माण में किया जा चुका है, जो इसकी उपयोगिता और मजबूती को दर्शाता है।











