रेलवे भर्ती मामला: हाईकोर्ट ने कैट का आदेश किया रद्द, याचिकाकर्ता को 4 सप्ताह में नियुक्ति देने का निर्देश

Johar News Times
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रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने रेलवे भर्ती से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) के आदेश को खारिज कर दिया है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता रविशंकर कुमार की नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त करते हुए रेलवे को चार सप्ताह के भीतर नियुक्ति पत्र जारी करने का आदेश दिया है।

अदालत की सख्त टिप्पणी: “भेदभावपूर्ण और मनमाना” सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि समान परिस्थितियों में अन्य उम्मीदवारों को नियुक्ति देना और याचिकाकर्ता को वंचित रखना असंवैधानिक है। अदालत ने कहा कि ऐसा व्यवहार पूरी तरह से भेदभावपूर्ण और मनमाना है।

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क्या है पूरा मामला?

  • पूर्व सैनिक का संघर्ष: प्रार्थी रविशंकर कुमार ने भारतीय सेना में 16 वर्षों तक सेवा दी थी। उन्होंने रेलवे की NTPC (नॉन टेक्निकल पॉपुलर कैटेगरी) के तहत आवेदन किया था।
  • विवाद की जड़: भर्ती के नियमों के अनुसार, अभ्यर्थी को 31 मार्च 2020 तक सेना से सेवानिवृत्त होना था, जबकि रविशंकर कुमार 30 अप्रैल 2020 को सेवानिवृत्त हुए।
  • रेलवे का निर्णय: दस्तावेज सत्यापन के समय रेलवे ने उनकी उम्मीदवारी यह कहते हुए रद्द कर दी कि वे कट-ऑफ तिथि के बाद सेवानिवृत्त हुए हैं और आवेदन में गलत जानकारी दी गई है।
  • कैट का रुख: याचिकाकर्ता ने इस फैसले को पहले कैट (रांची सर्किट बेंच) में चुनौती दी थी, लेकिन 23 अक्टूबर 2024 को कैट ने रेलवे के पक्ष में फैसला सुनाते हुए याचिका खारिज कर दी थी।

हाईकोर्ट से मिली राहत कैट के आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए माना कि जब समान परिस्थितियों वाले अन्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिल चुकी है, तो प्रार्थी को रोकना न्यायसंगत नहीं है। इसी आधार पर अदालत ने कैट के पुराने आदेश को निरस्त कर दिया।

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