खाड़ी क्षेत्र में जारी भीषण तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक सफलता की उम्मीद जागी है। पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध विराम के लिए एक व्यापक शांति प्रस्ताव पेश किया है, जिसे ‘इस्लामाबाद अकॉर्ड’ का नाम दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, यदि दोनों देश इस पर सहमत होते हैं, तो आज ही युद्ध रुकने की आधिकारिक घोषणा हो सकती है।
शांति का ‘दो-चरणीय’ फॉर्मूला
पाकिस्तान द्वारा सौंपे गए इस शांति प्रस्ताव को दो रणनीतिक हिस्सों में बांटा गया है:
- तत्काल सीजफायर: पहले चरण के तहत दोनों सेनाएं अपनी आक्रामक कार्रवाइयां तुरंत रोक देंगी।
- स्थायी समझौता: अगले 15 से 20 दिनों के भीतर वार्ता के जरिए एक अंतिम शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
खबरों के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर ने इस डील को अमलीजामा पहनाने के लिए अमेरिकी और ईरानी शीर्ष नेतृत्व के साथ पूरी रात मैराथन बैठकें की हैं। इस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को फिर से खोलना है, ताकि वैश्विक तेल आपूर्ति फिर से बहाल हो सके।
ईरान की ‘चौतरफा घेराबंदी’ की धमकी
जंग रुकने की चर्चाओं के बीच ईरान ने दुनिया को कड़ी चेतावनी भी दी है। ईरानी सुप्रीम लीडर के सलाहकार अली अकबर वेलायती ने साफ किया है कि अगर अमेरिका या इजराइल ने हमले बढ़ाए, तो वे न केवल होर्मुज, बल्कि बाब-अल-मंदेब जैसे अन्य प्रमुख समुद्री रास्तों को भी बंद कर देंगे। ईरान का कहना है कि वह सैन्य हमले का जवाब ‘ग्लोबल एनर्जी और सप्लाई चेन’ को ठप करके देगा।
ट्रम्प का अल्टीमेटम: ‘नरक बना देंगे’

दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के तेवर बेहद सख्त हैं। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर ईरान को सीधे तौर पर ललकारते हुए कहा है कि अगर मंगलवार तक होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स और पुलों को निशाना बनाएगा। ट्रम्प ने चेतावनी भरे लहजे में इसे ‘ब्रिज डे’ और ‘पावर प्लांट डे’ करार दिया है।
मध्यस्थों की भूमिका और 48 घंटे का ‘डेडलाइन’
अमेरिकी मीडिया आउटलेट ‘एक्सिओस’ के अनुसार, पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये संयुक्त रूप से इस संकट को सुलझाने में जुटे हैं। फिलहाल 45 दिनों के अस्थायी युद्धविराम पर चर्चा चल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले 48 घंटे यह तय करेंगे कि दुनिया एक बड़े ऊर्जा संकट की ओर जाएगी या शांति की राह पर लौटेगी।










