जमशेदपुर NML की वैश्विक धमक: देश में पहली बार तैयार हुआ 22 कैरेट सोने का ‘गोलाकार पाउडर’, 3D प्रिंटिंग में आएगी क्रांति

Jamshedpur NML's global impact: 22-carat gold 'spherical powder' produced for the first time in the country, revolutionizing 3D printing

Johar News Times
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जमशेदपुर (मुख्य संवाददाता): लौहनगरी स्थित CSIR-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (NML) ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में एक ऐसी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है, जिसने भारत को वैश्विक मानचित्र पर नई ऊंचाई दी है। NML के वैज्ञानिकों ने देश में पहली बार 22 कैरेट सोने का गोलाकार (Spherical) पाउडर विकसित करने में सफलता पाई है। यह विशेष पाउडर अत्याधुनिक थ्री-डी प्रिंटिंग (3D Printing) तकनीक के लिए तैयार किया गया है।

क्या है यह उपलब्धि और क्यों है खास?

बिष्टुपुर में आयोजित एक तकनीकी संगोष्ठी के दौरान NML के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. के. गोपाला ने इस नवाचार की जानकारी साझा की।

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  • एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग: यह गोल्ड पाउडर विशेष रूप से ‘एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग’ के लिए बनाया गया है। 3D प्रिंटिंग की सफलता पूरी तरह से मेटल पाउडर की गुणवत्ता और उसके कणों के आकार (Shape) पर निर्भर करती है।
  • स्वदेशी तकनीक: NML ने अपनी उन्नत “स्पेशल गैस एटोमाइजर” तकनीक का उपयोग कर इस उच्च गुणवत्ता वाले स्फेरिकल पाउडर को तैयार किया है।

आभूषण और तकनीक क्षेत्र में आएगा ‘गोल्डन’ बदलाव

विशेषज्ञों का मानना है कि इस खोज से दो प्रमुख क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव आएंगे:

  1. ज्वेलरी उद्योग: अब सोने के ऐसे जटिल और बारीक डिजाइन वाले आभूषण बनाना संभव होगा, जो पारंपरिक ढलाई या हस्तशिल्प विधियों से असंभव थे।
  2. तकनीकी उत्पाद: अंतरिक्ष विज्ञान (Space) और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में जहां सोने के सूक्ष्म पुर्जों की आवश्यकता होती है, वहां इस 3D प्रिंटिंग तकनीक का बड़ा लाभ मिलेगा।

‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में बड़ा कदम

अभी तक इस तरह के उच्चस्तरीय मेटल पाउडर्स के लिए भारत काफी हद तक आयात पर निर्भर था।

  • विदेशी मुद्रा की बचत: देश में ही इस तकनीक के विकसित होने से आयात कम होगा और लागत में भी कमी आएगी।
  • इंडस्ट्री-लैब तालमेल: संगोष्ठी में मौजूद विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि NML द्वारा विकसित इस तकनीक को सीधे उद्योगों (Industries) से जोड़ा जाए, ताकि लैब का यह आविष्कार बाजार और उत्पादन क्षमता का हिस्सा बन सके।

निष्कर्ष

जमशेदपुर की NML लैब ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि झारखंड केवल खनिजों का प्रदेश नहीं, बल्कि उच्च स्तरीय शोध और मेधा का केंद्र भी है। 22 कैरेट गोल्ड पाउडर का यह निर्माण न केवल ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती देगा, बल्कि भविष्य में भारत को 3D प्रिंटिंग तकनीक का हब बनाने में भी सहायक होगा।


संस्थान: CSIR-NML, जमशेदपुर

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तकनीक: स्पेशल गैस एटोमाइजर (3D प्रिंटिंग हेतु)

प्रमुख योगदान: डॉ. के. गोपाला एवं टीम

बने रहें विज्ञान और तकनीक की ताज़ा अपडेट्स के लिए।

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