विशेष रिपोर्ट: बागबेड़ा में ‘प्यास’ पर भारी सरकारी सिस्टम, करोड़ों का प्लांट अब खंडहर

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Johar News Times
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जमशेदपुर (बागबेड़ा): जमशेदपुर के बागबेड़ा क्षेत्र में करोड़ों की लागत से तैयार हुई ‘ग्रामीण जलापूर्ति योजना’ आज सरकारी उदासीनता और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती दिख रही है। जिस प्रोजेक्ट को हजारों घरों की प्यास बुझानी थी, वह अब खुद अपनी बदहाली की कहानी सुना रहा है।

खंडहर बना वाटर ट्रीटमेंट प्लांट: जंग खाते करोड़ों के उपकरण

जमीनी हकीकत यह है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट सफेद हाथी बनकर रह गया है। प्लांट की स्थिति देख कर अंदाजा लगाया जा सकता है कि जनता का पैसा कैसे बर्बाद हो रहा है:

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  • बर्बाद होते यंत्र: प्लांट में लगे फिल्टर, मोटर और अन्य महंगे उपकरण अब जंग की मोटी परत के नीचे दब चुके हैं।
  • परिसर में अव्यवस्था: पूरा प्लांट परिसर झाड़ियों और गंदगी से अटा पड़ा है। देखरेख के लिए न तो सुरक्षा गार्ड है और न ही कर्मचारी।
  • अधूरी पाइपलाइन: पाइपलाइन बिछाने का काम वर्षों बाद भी पूरा नहीं हो पाया। कई सड़कों पर पाइप डालकर वैसे ही छोड़ दिए गए हैं, जो अब टूटने लगे हैं।

“हमें आवास नहीं, पानी चाहिए”

बागबेड़ा की जनता में इस विफलता को लेकर गहरा आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की अन्य योजनाएं आती-जाती रहती हैं, लेकिन उनकी सबसे बुनियादी जरूरत ‘साफ पानी’ आज भी अधूरी है।

“हमें बड़े-बड़े वादों और आवास की योजनाओं से पहले पानी चाहिए। वर्षों से हम देख रहे हैं कि काम चल रहा है, लेकिन हमारे नलों में पानी की एक बूंद तक नहीं आई। यह सिर्फ कागजों पर चलने वाली योजना बनकर रह गई है।” > — एक स्थानीय निवासी

जांच की मांग: जिम्मेदारी तय हो

स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों ने इस पूरी योजना में भारी अनियमितता का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी योजना का विफल होना एक बड़े घोटाले की ओर इशारा करता है।

  • अनियमितता के आरोप: प्रतिनिधियों ने मांग की है कि इस योजना की उच्च स्तरीय जांच हो।
  • जवाबदेही: ग्रामीणों का सवाल है कि जब प्लांट और पाइपलाइन पूरी तरह चालू ही नहीं हुए, तो फंड का बंदरबांट कैसे हो गया?

निष्कर्ष: इंतजार की हद पार

बागबेड़ा के लोगों के लिए “इंतजार की भी हद होती है” वाली कहावत अब सच साबित हो रही है। अगर जल्द ही इस योजना को पुनर्जीवित नहीं किया गया और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो करोड़ों की यह मशीनरी पूरी तरह कबाड़ में बदल जाएगी और क्षेत्र की जनता बूंद-बूंद पानी के लिए तरसती रहेगी।


प्रभंजन कुमार , जमशेदपुर।

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