सरायकेला-खरसावां जिले के किसानों को आधुनिक, वैज्ञानिक और मुनाफे वाली खेती से जोड़ने के लिए जिला प्रशासन ने एक बड़ी पहल की है। झारखंड सरकार के निर्देश और उपायुक्त श्री नितिश कुमार सिंह के आदेश पर शुक्रवार को समाहरणालय परिसर से ‘डिजिटल बिरसा कृषि जागरूकता रथ अभियान’ का भव्य शुभारंभ किया गया।
समाहरणालय परिसर में जिला आपूर्ति पदाधिकारी श्री पुष्कर सिंह मुंडा, जिला कृषि पदाधिकारी श्री रोशन नीलकमल, जिला पशुपालन पदाधिकारी और जिला गव्य विकास पदाधिकारी ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर दो विशेष डिजिटल रथों को रवाना किया।
दोनों अनुमंडलों में 15 दिनों तक चलेगा जागरूकता अभियान
किसानों तक कृषि, पशुपालन और डेयरी से जुड़ी सरकारी योजनाओं की जानकारी प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए यह अभियान शुरू किया गया है।
- दो रथ रवाना: जिले के दोनों अनुमंडलों (सरायकेला और चांडिल) के लिए एक-एक डिजिटल बिरसा रथ रवाना किया गया है।
- पंचायतों का भ्रमण: ये रथ अगले 15 दिनों तक दोनों अनुमंडलों की सभी ग्राम पंचायतों का तूफानी दौरा करेंगे।
हर पंचायत में सजेगी ‘किसान संगोष्ठी’, मिलेंगे ये हाईटेक टिप्स
डिजिटल बिरसा रथ के हर पंचायत में पहुंचने पर वहां विशेष ‘किसान संगोष्ठी’ का आयोजन किया जाएगा। इन संगोष्ठियों में कृषि विशेषज्ञ और विभागीय अधिकारी किसानों को निम्नलिखित विषयों पर लाइव जानकारी देंगे:
- आधुनिक व वैज्ञानिक खेती: उन्नत बीजों का चयन और मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन।
- ऑर्गेनिक फार्मिंग: प्राकृतिक एवं जैविक खेती के तरीके और कृषि यंत्रीकरण।
- विविधीकरण व जल संचयन: फसल विविधीकरण और कम पानी में बेहतर सिंचाई के लिए जल संरक्षण।
- संबद्ध क्षेत्र: पशुपालन, डेयरी विकास और गव्य विकास विभाग की योजनाओं पर तकनीकी मार्गदर्शन।
इसके साथ ही किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की ऑनलाइन व ऑफलाइन प्रक्रिया, मिलने वाले अनुदान और अन्य उपलब्ध सुविधाओं से भी रूबरू कराया जाएगा।
मकसद: उत्पादकता बढ़े और किसान बनें आत्मनिर्भर
खेतों तक पहुंचेगी नई तकनीक: जिला प्रशासन जिला कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, “डिजिटल बिरसा रथ के जरिए हमारा लक्ष्य हर पंचायत के आखिरी किसान तक पहुंचना है। हमारा मुख्य मकसद किसानों को जागरूक करना, फसलों की उत्पादकता बढ़ाना और उनकी आय को दोगुना कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।”
जिला प्रशासन की अपील— बढ़-चढ़कर लें हिस्सा जिला प्रशासन ने सरायकेला के सभी किसान भाइयों से अपील की है कि जब यह डिजिटल बिरसा कृषि जागरूकता रथ उनकी पंचायत में पहुंचे, तो वे अपने काम छोड़कर किसान संगोष्ठियों में अधिक से अधिक संख्या में भाग लें। किसान सीधे कृषि विशेषज्ञों से संवाद कर अपनी समस्याओं का ऑन-द-स्पॉट समाधान पा सकते हैं।
अब देखना होगा कि 15 दिनों का यह महाअभियान सरायकेला के खेतों और किसानों की तकदीर बदलने में कितना कारगर साबित होता है।
