गढ़वा में हाहाकार: कस्तूरबा विद्यालय की 100 से अधिक छात्राएं बीमार, हॉस्टल में नहीं थीं वार्डन; आक्रोशित अभिभावकों को पुलिस ने गेट खुलवाकर निकाला अंदर

"सिस्टम की बड़ी लापरवाही: गढ़वा कस्तूरबा स्कूल में 100 से ज्यादा छात्राएं बीमार, हॉस्टल छोड़ गायब थीं वार्डन!"

Johar News Times
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झारखंड के गढ़वा जिले से एक बेहद हैरान और विचलित करने वाली खबर सामने आई है। जिले के खरौंधी स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में शुक्रवार को कथित तौर पर दूषित भोजन खाने और भीषण गर्मी में टंकी का खौलता हुआ गर्म पानी पीने से 100 से अधिक छात्राएं एक साथ बीमार पड़ गईं।

हैरत की बात यह है कि करीब 300 छात्राओं वाले इस हॉस्टल में घटना के वक्त न तो वार्डन मौजूद थीं और न ही एकाउंटेंट। इस बड़ी लापरवाही ने विद्यालय प्रबंधन और शिक्षा विभाग को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है।

खौलता पानी पीने को मजबूर हुईं छात्राएं, 75% बच्चियों की तबीयत बिगड़ी हॉस्टल की पीड़ित छात्राओं ने बताया कि दोपहर के भोजन में उन्हें पुआ और चावल दिया गया था। इलाके में बिजली गुल होने के कारण छत पर रखी टंकी का पानी अत्यधिक गर्म हो गया था, जिसे पीने के लिए वे मजबूर थीं। इसके बाद शाम को मुरमुरा खाने के बाद भी उन्हें पीने का साफ पानी नसीब नहीं हुआ।

शाम ढलते ही एक-एक कर छात्राओं को तेज पेट दर्द, उल्टी और चक्कर आने की शिकायत होने लगी। देखते ही देखते हॉस्टल की लगभग 75 प्रतिशत छात्राएं गंभीर रूप से बीमार महसूस करने लगीं। छात्राओं का आरोप है कि परिसर में जनरेटर की सुविधा होने के बावजूद पानी की मोटर नहीं चलाई गई।

मामला दबाने का आरोप, पुलिस के हस्तक्षेप के बाद खुला गेट

घटना के बाद विद्यालय प्रशासन पर मामले को दबाने और लीपापोती करने का गंभीर आरोप लगा है। शाम से ही बच्चियों के तड़पने के बावजूद हॉस्टल प्रबंधन ने बाहर किसी को भनक नहीं लगने दी। जब भनक मिलने पर बदहवास अभिभावक और ग्रामीण हॉस्टल पहुंचे, तो उन्हें मुख्य गेट पर ही रोक दिया गया और अंदर जाने की इजाजत नहीं दी गई। इसके बाद बाहर जमकर हंगामा हुआ। सूचना मिलते ही स्थानीय थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और उनके कड़े हस्तक्षेप के बाद ही हॉस्टल का मुख्य गेट खोला जा सका।

अस्पताल में मची चीख-पुकार, 2 छात्राओं की हालत बेहद गंभीर

रात करीब 9 बजे आनन-फानन में बीमार बच्चियों को भवनाथपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। अस्पताल में इस वक्त 20 से अधिक छात्राओं की हालत नाजुक बनी हुई है।

  • गंभीर रूप से बीमार: नैना और काजल नाम की दो छात्राओं की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बताई जा रही है।
  • इलाजरत छात्राएं: इनके अलावा देवरानी कुमारी, रूपा कुमारी, विनीता कुमारी, रौशनी कुमारी और चंदा कुमारी समेत दर्जनों बच्चियों का बेड पर इलाज चल रहा है।

शुरुआती जांच में फूड प्वाइजनिंग की आशंका घटना की जानकारी मिलते ही बीडीओ नंद जी राम और अंचलाधिकारी शंभू राम तुरंत अस्पताल पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह मामला फूड प्वाइजनिंग और भीषण गर्मी में अत्यधिक गर्म या दूषित पानी पीने के कारण हुआ है। फिलहाल सभी का इलाज जारी है और स्थिति को नियंत्रण में लाने का प्रयास किया जा रहा है।

दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग इस घटना को लेकर अभिभावकों और स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। उन्होंने मांग की है कि ड्यूटी से गायब रहने वाली वार्डन और एकाउंटेंट, समय पर इलाज न कराने और बीमार बच्चियों के माता-पिता को रोकने के इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को तत्काल सस्पेंड कर कानूनी कार्रवाई की जाए।

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