प्रखंड मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक शिव मंदिर परिसर में सोमवार को पारंपरिक गाजन पर्व अत्यधिक हर्षोल्लास, अटूट आस्था और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। इस लोक पर्व के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ क्षेत्र की समृद्ध लोक संस्कृति और अनूठी सांस्कृतिक विरासत की बेहद खूबसूरत झलक देखने को मिळाली।
जक नदी से निकली भव्य शोभायात्रा, जयकारों से गूंजा परिसर
उत्सव की शुरुआत सोमवार सुबह जक नदी के टुमका घाट से हुई। घाट पर ‘पाट भोक्ता’ की गरिमामयी अगवानी के बाद, पारंपरिक गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़ों और ‘हर-हर महादेव’ के गगनभेदी जयकारों के बीच एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। जब यह शोभायात्रा मुख्य शिव मंदिर परिसर पहुंची, तो पूरा वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठा। इसके बाद विद्वान पुरोहितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार और संपूर्ण विधि-विधान के साथ भगवान शिव की विशेष महापूजा संपन्न कराई गई। इससे पूर्व, शनिवार की शाम को ‘गोईरा भार’ की प्राचीन वैदिक परंपरा के अनुसार मुख्य अनुष्ठान पूरे किए गए थे।
देर रात तक चले पारंपरिक छऊ नृत्य ने मोहा मन
इस वर्ष गाजन पर्व का मुख्य आकर्षण रविवार की रात को आयोजित पारंपरिक छऊ नृत्य (Chhau Dance) कार्यक्रम रहा। पश्चिम बंगाल और झारखंड के सीमावर्ती कलाकारों द्वारा प्रस्तुत की गई पौराणिक और सांस्कृतिक कथाओं पर आधारित देर रात तक चली मनमोहक प्रस्तुति का स्थानीय ग्रामीणों और दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने भरपूर आनंद लिया।
सांस्कृतिक महत्व: स्थानीय प्रबुद्ध ग्रामीणों ने बताया कि ऐसे पारंपरिक और सदियों पुराने आयोजन क्षेत्र की मूल संस्कृति, लोक परंपरा और अनमोल धरोहर को संरक्षित रखने के साथ-साथ इसे नई पीढ़ी तक जीवंत रूप में पहुंचाने का एक बेहद महत्वपूर्ण और सशक्त माध्यम हैं।
आयोजन समिति और ग्रामीणों की रही सराहनीय भूमिका
सप्ताह भर चले इस भव्य आयोजन के दौरान शिव मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही, जिसे देखते हुए सुरक्षा और सेवा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पूरे कार्यक्रम को शांतिपूर्ण और भव्य तरीके से सफल बनाने में अमित गिरि, देवानंद गिरि, सुशील बारिक, सुनील गिरि, देवाशीष गिरि, राहुल मदिना, दिलीप पंडा, बसंत मदीना सहित समस्त आयोजन समिति और स्थानीय ग्रामीणों की अत्यंत सराहनीय व सक्रिय भूमिका रही।
