बनमाकड़ी घाट पर डंप है 4 लाख CFT बालू, लेकिन चालान के फेर में बिक्री बंद, निर्माण कार्य ठप

Johar News Times
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गुड़ाबांदा प्रखंड की बनमाकड़ी पंचायत स्थित सुवर्णरेखा नदी घाट पर करीब 4 लाख सीएफटी (CFT) बालू का विशाल भंडारण होने के बावजूद आम जनता को वैध बालू नसीब नहीं हो पा रहा है। बालू की कमी और विभागीय अनदेखी के कारण प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) सहित कई महत्वपूर्ण सरकारी, अर्ध-सरकारी और निजी निर्माण कार्य पूरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। स्थानीय लोगों और भवन निर्माताओं को विवश होकर चोर-बाजार से ऊंचे और मनमाने दामों पर बालू खरीदना पड़ रहा है, जिससे आम जनता में प्रशासन के खिलाफ नाराजगी बढ़ती जा रही है।

एनजीटी (NGT) की रोक से पहले कंपनी ने किया था सुरक्षित स्टॉक

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) के सख्त निर्देशानुसार, मानसून के मद्देनजर 10 जून से नदी घाटों से सीधे बालू के उठाव और खनन पर पूरी तरह रोक लागू है। इस संभावित संकट और कमी को देखते हुए, सरकार द्वारा अधिकृत कंपनी ‘गोदावरी कमोडिटीज लिमिटेड’ ने रोक की समय-सीमा से पहले ही सुवर्णरेखा नदी तट पर पर्याप्त मात्रा में बालू का सुरक्षित भंडारण (डंप) कर लिया था ताकि बारिश के दिनों में विकास कार्य प्रभावित न हों। लेकिन विभागीय प्रक्रियाओं और कागजी लेटलतीफी के कारण इस दूरदर्शी कदम का लाभ जनता को नहीं मिल पा रहा है।

“वैध चालान के बिना नहीं बेच सकते बालू”: कंपनी

मामले के संबंध में जानकारी देते हुए गोदावरी कमोडिटीज लिमिटेड के साइट इंचार्ज जितेंद्र कुमार ने बताया:

“खनन विभाग की ओर से कंपनी को अब तक बालू की व्यावसायिक बिक्री के लिए आवश्यक आधिकारिक चालान (E-Challan) जारी नहीं किया गया है। सरकारी नियमों के तहत बिना वैध चालान के एक सीएफटी बालू भी बेचना पूरी तरह गैर-कानूनी है, इसलिए स्टॉक होने के बावजूद हम चाहकर भी लोगों को आपूर्ति शुरू नहीं कर पा रहे हैं।”

खनन विभाग का तर्क: बिना ‘धर्मकांटा’ के नहीं मिलेगी अनुमति

दूसरी ओर, इस पूरे गतिरोध पर जिला खनन पदाधिकारी (DMO) सतीश कुमार नायक ने विभाग का पक्ष रखते हुए वजह साफ की है। उन्होंने कहा कि कंपनी ने बालू का स्टॉक तो कर लिया है, लेकिन बिक्री शुरू करने के लिए जो आवश्यक आधारभूत संरचना (Infrastructure) होनी चाहिए, उसे अभी तक पूरा नहीं किया गया है।

खनन पदाधिकारी के अनुसार, नियमों के तहत डंप साइट पर धर्मकांटा (वेट ब्रिज) स्थापित करना अनिवार्य है ताकि बालू ले जाने वाले वाहनों का सटीक वजन किया जा सके। इसके अलावा कुछ अन्य जरूरी प्रक्रियाएं भी अधूरी हैं। जैसे ही कंपनी धर्मकांटा स्थापित कर अन्य औपचारिकताएं पूरी कर लेगी, विभाग तुरंत चालान जारी कर बालू बिक्री की अनुमति दे देगा।

जनता की मांग- नियमों के जाल से निकालें, जल्द शुरू हो बिक्री

स्थानीय ग्रामीणों, पंचायत प्रतिनिधियों और ठेकेदारों का कहना है कि जब वैध बालू का इतना बड़ा स्टॉक आँखों के सामने उपलब्ध है, तो केवल कागजी और तकनीकी प्रक्रियाओं के कारण आम जनता और सरकारी योजनाओं को अधर में नहीं लटकाया जाना चाहिए। उन्होंने जिला उपायुक्त (DC) से इस मामले में हस्तक्षेप करने और जनहित में त्वरित समाधान निकालने की मांग की है।

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