गुड़ाबांदा में अवैध खनन पर बड़ा एक्शन! बिना नंबर की JCB ज़ब्त, अंचल कार्यालय ने कहा— नहीं दी गई थी कोई NOC

CO का बड़ा खुलासा: बिना NOC के गुड़ाबांदा में खोदी जा रही थी मुरुम और मिट्टी, जांच घेरे में संवेदक।

Johar News Times
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पूर्वी सिंहभूम जिले के गुड़ाबांदा प्रखंड में कथित अवैध मुरुम और मिट्टी खनन के एक बड़े मामले में प्रशासनिक जांच तेज हो गई है। भालकी पंचायत से कन्यालुका जाने वाली सड़क के किनारे केनाल की सर्विस रोड निर्माण के दौरान नियमों को ताक पर रखकर की जा रही अवैध खुदाई की शिकायत के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है।

फॉरेस्ट लैंड नहीं, तो मामला पूरी तरह ‘अवैध माइनिंग’ का

मामले की गंभीरता को देखते हुए गुड़ाबांदा थाना के सब-इंस्पेक्टर राजेश हांसदा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अवैध खनन में जुटी एक जेसीबी मशीन को जब्त कर थाने में खड़ा करा दिया था। थाना से मिली आधिकारिक सूचना के आधार पर वन विभाग के फॉरेस्टर सुनाराम सबर ने अपनी टीम के साथ खनन स्थल का भौतिक निरीक्षण किया। अत्याधुनिक जीपीएस तकनीक के माध्यम से की गई पैमाइश के बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित जमीन वन विभाग के अंतर्गत नहीं आती है। वन भूमि नहीं होने की पुष्टि होने के बाद अब यह मामला सीधे तौर पर जिला खनन विभाग के दायरे में आ गया है।

अंचलाधिकारी का बड़ा बयान: ‘नहीं जारी की गई कोई NOC’

इस पूरे मामले पर गुड़ाबांदा के अंचलाधिकारी डांगुर कोड़ाह ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उक्त चिन्हित क्षेत्र में मुरुम या मिट्टी के खनन के लिए अंचल कार्यालय की ओर से किसी भी तरह की अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी नहीं की गई है। अंचल अधिकारी के इस खुलासे के बाद चल रही खनन गतिविधियों की अवैधता पर मुहर लग गई है। अब थाना पुलिस जब्त जेसीबी पर आगे की कानूनी कार्रवाई और जुर्माना तय करने के लिए जिला खनन विभाग को लिखित रिपोर्ट भेजने की तैयारी में है।

पंकज दयाल के पास है ठेका, मौके से फरार हुए लोग

प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्तमान में जीरो प्वाइंट से गालूडीह बराज तक केनाल सर्विस रोड के निर्माण का कार्य चल रहा है, जिसका ठेका पंकज दयाल नामक संवेदक के पास है। पुलिस के अनुसार, जब छापेमारी टीम मौके पर पहुंची, तो भनक लगते ही वहाँ अवैध काम में लगे मजदूर और ऑपरेटर फरार हो गए।

बिना नंबर की JCB बढ़ा रही है सस्पेंस

पुलिस के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती ज़ब्त की गई जेसीबी के मालिक का पता लगाना है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस भारी-भरकम मशीन पर कोई भी रजिस्ट्रेशन या पंजीकरण संख्या अंकित नहीं है। प्रशासन इस मामले की हर पहलू से बारीकी से जांच कर रहा है। पुलिस का कहना है कि खनन विभाग की अंतिम तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद इस अवैध सिंडिकेट से जुड़े ठेकेदार और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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