सरायकेला: स्ट्रीट फूड वेंडर्स के लिए विशेष ट्रेनिंग; अखबार में खाना देने और रंग मिलाने पर रोक, बांटी गई मुफ्त हाइजीन किट

"सेहत से खिलवाड़ नहीं! अखबार में खाना देने और केमिकल रंगों के इस्तेमाल पर लगी रोक, स्ट्रीट वेंडर्स ने सीखा स्वच्छता का पाठ।"

Johar News Times
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खाद्य सुरक्षा विभाग, सरायकेला-खरसावां द्वारा स्ट्रीट फूड वेंडर्स के लिए एक विशेष निःशुल्क खाद्य सुरक्षा प्रशिक्षण, प्रमाण पत्र एवं हाइजीन किट वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आदित्यपुर स्थित ‘जस्ट चिल रेस्टोरेंट’ के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य फुटपाथ दुकानदारों को आम जनता के लिए सुरक्षित, शुद्ध और स्वच्छ भोजन परोसने की आदतों के प्रति जागरूक करना था।

फ्री हाइजीन किट और ट्रेनिंग सर्टिफिकेट का वितरण

झारखंड सरकार के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के निर्देशानुसार, नेशनल एसोसिएशन ऑफ स्ट्रीट वेंडर्स ऑफ इंडिया और नेस्ले के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में 100 महिला एवं पुरुष विक्रेताओं ने भाग लिया। ट्रेनिंग पूरी करने वाले सभी वेंडर्स को निम्नलिखित सामग्री निःशुल्क दी गई:

  • हाइजीन किट: एप्रन, कैप, ग्लव्स, साबुन, तौलिया, डस्टर एवं हेडगियर।
  • सर्टिफिकेट व बुकलेट: FoSTaC प्रशिक्षण प्रमाण पत्र, गोल्डन रूल्स बुकलेट तथा NASVI व नेस्ले द्वारा जारी संयुक्त सर्टिफिकेट।

अखबार में खाना परोसने और नकली रंगों के इस्तेमाल पर रोक: सुबीर रंजन

कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी श्री सुबीर रंजन ने वेंडर्स की आजीविका और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर जोर देते हुए कहा:

“ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम समाज में स्वच्छ भोजन संस्कृति को बढ़ावा देते हैं। सभी वेंडर्स खाद्य पदार्थों में औद्योगिक रंगों के उपयोग से पूरी तरह बचें। साथ ही, अखबार में खाना परोसने की प्रथा को तुरंत समाप्त करें, क्योंकि अखबार की स्याही सेहत के लिए बेहद खतरनाक है।”

ट्रेनर ने सिखाए शुद्धता के ‘गोल्डन रूल्स’

FoSTaC के अधिकृत प्रशिक्षक श्री एस. एस. दीपक ने वेंडर्स को व्यक्तिगत साफ-सफाई से लेकर दुकान व ठेले के रखरखाव की बारीक जानकारियां दीं। उन्होंने मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर प्रकाश डाला:

  • खाद्य सामग्री का सुरक्षित भंडारण और सही तापमान प्रबंधन।
  • बर्तनों-उपकरणों की स्वच्छता और केवल सुरक्षित पेयजल का उपयोग।
  • संक्रमण एवं कीटाणु नियंत्रण के उपाय।
  • खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और नियम, 2011 के तहत वेंडर्स के अधिकार व नियम।

यह पहल न केवल सड़क किनारे रेहड़ी-पटरी लगाने वाले दुकानदारों के प्रति ग्राहकों का भरोसा बढ़ाएगी, बल्कि फूड पॉइजनिंग और अन्य बीमारियों की रोकथाम में भी मील का पत्थर साबित होगी।

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