मोहरदा में 340 परिवारों का पूरा हुआ अपने आशियाने का सपना, धूमधाम से हुआ प्रधानमंत्री आवास योजना का गृह प्रवेश

"किराये के मकान से अपने आशियाने तक का सफर: जमशेदपुर के मोहरदा में गूंजी गृह प्रवेश की शहनाई, खिले 340 परिवारों के चेहरे।"

Johar News Times
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जमशेदपुर: बरसों से अपने स्थायी घर की आस लगाए बैठे 340 गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जमशेदपुर के बिरसानगर स्थित मोहरदा आवासीय परिसर में लाभुकों को उनके नए फ्लैट्स की चाबियां सौंपी गईं। इस ऐतिहासिक मौके पर पूरे मोहरदा परिसर में उत्सव जैसा माहौल देखा गया और कई परिवारों की आंखें खुशी से छलक उठीं।

मंत्री ने किया ऑनलाइन उद्घाटन, जनप्रतिनिधियों ने कराई पूजा

इस भव्य गृह प्रवेश कार्यक्रम का उद्घाटन झारखंड सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री सुनील कुमार (सुदीव्य कुमार सोनू) ने ऑनलाइन माध्यम से किया। वहीं, कार्यक्रम स्थल पर सांसद विद्युत वरण महतो और जमशेदपुर पूर्वी की विधायक पूर्णिमा साहू मुख्य रूप से मौजूद रहीं। दोनों जनप्रतिनिधियों ने लाभुकों के साथ मिलकर पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और दीप जलाकर उन्हें गृह प्रवेश कराया।

पहले चरण में 340 परिवारों को मिली चाबी

मोहरदा आवासीय परियोजना के तहत कुल 644 फ्लैटों का निर्माण कराया गया है। इनमें से 340 ऐसे लाभुक थे जिन्होंने बैंक ऋण और निर्धारित अंशदान की सभी कागजी व वित्तीय औपचारिकताएं पूरी कर ली थीं। पहले चरण में इन्हीं 340 परिवारों को पजेशन सौंपा गया है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, शेष बचे पात्र लाभुकों को भी प्रक्रिया पूरी होते ही आगे के चरणों में जल्द ही फ्लैट सौंप दिए जाएंगे।

रघुवर दास के कार्यकाल में रखी गई थी आधारशिला

आपको बता दें कि इस महत्वाकांक्षी किफायती आवास परियोजना की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के कार्यकाल में हुई थी। बीच में कुछ प्रशासनिक और तकनीकी अड़चनों के कारण काम की रफ्तार धीमी जरूर हुई, लेकिन आखिरकार अब यह धरातल पर उतरी है, जिससे निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों को उनके हक का छत मिल सका है।

किराये के बोझ से मिली मुक्ति: भावुक हुए लाभुक

नए घर की चाबी पाकर लाभुकों ने सरकार और प्रशासन के प्रति आभार जताया। कई लाभार्थियों ने बताया कि वे पीढ़ियों से किराये के मकानों में रहने को मजबूर थे, जिससे उनकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा किराये में चला जाता था। अब अपना पक्का घर मिलने से उनके जीवन में आर्थिक स्थिरता और समाज में एक नया सम्मान मिला है।

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