अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। दोनों देशों ने पुष्टि की है कि समझौता अंतिम रूप से तैयार हो चुका है और इस पर दोनों राष्ट्राध्यक्षों के हस्ताक्षर हो चुके हैं।
फ्रांस के ऐतिहासिक वर्साय पैलेस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ रात्रिभोज के दौरान इस समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भी पुष्टि की कि दस्तावेज़ दोनों राष्ट्रपतियों के हस्ताक्षर के साथ अंतिम रूप ले चुका है।
यूरेनियम कार्यक्रम पर सहमति, बदले में आर्थिक राहत
‘इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ के तहत ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम के स्तर को कम करने पर सहमत हुआ है। इसके बदले अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की ओर से व्यापक आर्थिक राहत, प्रतिबंधों में ढील और आर्थिक सहयोग का रास्ता खुलेगा। समझौते में युद्धविराम, आर्थिक सहयोग बढ़ाने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर आगे की बातचीत का रोडमैप भी शामिल है।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य फिर खुलने का रास्ता साफ
हस्ताक्षर के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “यह आसान नहीं था।” वहीं इमैनुएल मैक्रों ने समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि इससे स्थायी शांति की दिशा में प्रगति होगी और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे वैश्विक ऊर्जा कीमतों में भी कमी आ सकती है।
कई महीनों के तनाव के बाद आया समझौता
यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब पिछले कई महीनों से ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच तनाव और सैन्य टकराव बढ़ता जा रहा था। विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने की दिशा में एक बड़ा कूटनीतिक कदम साबित हो सकता है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अंतिम व्यापक समझौते के लिए प्रस्तावित 60 दिनों की वार्ता अवधि औपचारिक रूप से शुरू हो गई है या नहीं। इसके अलावा यह भी साफ नहीं है कि वर्साय में किए गए हस्ताक्षर ट्रंप की पहले दी गई डिजिटल मंजूरी से किस तरह अलग हैं। फिर भी, इस समझौते को पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।
