पत्रकारिता की बड़ी जीत: कोरोना काल में पत्रकार बसंत साहू पर दर्ज ‘फर्जी मुकदमा’ हाई कोर्ट ने किया रद्द, जन्मदिन पर मिला न्याय का तोहफा

कोरोना काल में पत्रकार बसंत साहू पर हुआ फर्जी केस हाई कोर्ट से निरस्त, जन्मदिन पर मिला न्याय का बड़ा तोहफा।

Johar News Times
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सरायकेला (झारखंड): कोरोना महामारी के कठिन दौर में सच दिखाने के कारण कानूनी प्रताड़ना झेल रहे वरिष्ठ पत्रकार बसंत कुमार साहू को आखिरकार 6 साल बाद न्याय मिल गया है। रांची उच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सरायकेला-खरसावां जिले के चौका थाना में दर्ज कांड संख्या 24/2020 को पूरी तरह से निरस्त कर दिया है। बेहद खास बात यह रही कि माननीय न्यायालय का यह फैसला सोमवार 15 जून को आया, जो कि बसंत साहू का जन्मदिन भी है। इस दोहरी खुशी से पूरे राज्य के पत्रकार समुदाय में जश्न का माहौल है।

यह विवाद मई 2020 (कोरोना काल) का है, जब सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ प्रखंड स्थित पुराणडीह गांव में दो व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे।

  • पत्रकार बसंत साहू ने इस खबर की सत्यता के लिए तत्कालीन उपायुक्त अंजनेयुलु डोडे से मोबाइल पर बातचीत की थी।
  • उन्होंने इस बातचीत की आधिकारिक रिकॉर्डिंग के साथ खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
  • हालांकि, खबर से नाराज होकर तत्कालीन उपायुक्त ने 23 मई 2020 को चौका थाना में पत्रकार के खिलाफ भ्रामक खबर फैलाने का आरोप लगाते हुए फर्जी मामला दर्ज करा दिया।
  • इस मुकदमे के बाद तत्कालीन चौका थाना प्रभारी सत्यवीर कुमार ने बिना किसी कानूनी नोटिस के पत्रकार बसंत साहू को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

देशभर में हुआ था भारी विरोध

एक सच्चे पत्रकार की इस तरह हुई अवैध गिरफ्तारी के बाद देश भर के मीडिया संगठनों में आक्रोश फैल गया था। पत्रकारों ने काला बिल्ला लगाकर इस दमनकारी कार्रवाई का पुरजोर विरोध किया। तत्कालीन झारखंड सरकार और विपक्षी दल भाजपा ने भी प्रशासन की इस मनमानी की कड़े शब्दों में निंदा की थी।

हाई कोर्ट ने माना—तथ्यों पर आधारित नहीं था केस

जेल से आने के बाद बसंत साहू ने हिम्मत नहीं हारी और रांची के वरिष्ठ अधिवक्ता ए. सहानी के माध्यम से रांची उच्च न्यायालय में याचिका (Cr.M.P. 4348/2022) दायर की। मामले की गहन सुनवाई के बाद माननीय उच्च न्यायालय ने पाया कि पत्रकार के खिलाफ दर्ज किया गया यह मामला पूरी तरह निराधार और तथ्यों से परे था। न्यायालय ने 15 जून 2026 को इस मुकदमे को पूरी तरह खारिज कर दिया।

“यह जीत देश के चौथे स्तंभ की है”

“यह जीत सिर्फ मेरी व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि पूरे भारतवर्ष के उन पत्रकारों की जीत है जो विपरीत परिस्थितियों में भी सच लिखते हैं। इस फैसले ने मीडिया पर झूठे मुकदमे थोपने वाले अधिकारियों को एक कड़ा और सशक्त संदेश दिया है कि सच की आवाज को दबाया नहीं जा सकता।”बसंत कुमार साहू, वरिष्ठ पत्रकार

“पत्रकारिता पर इस तरह के प्रशासनिक हमले कभी बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। बसंत साहू के केस से यह साफ हो गया है कि सच दिखाने वाली कलम को कोई भी फर्जी मुकदमों के दम पर जेल की सलाखों के पीछे ज्यादा दिन नहीं रख सकता।”प्रितम सिंह भाटिया, राष्ट्रीय सलाहकार

साहू के जन्मदिन पर कटा केक, शुभचिंतकों ने दी बधाई

कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय की जानकारी मिलते ही सरायकेला और आसपास के क्षेत्रों के पत्रकारों और शुभचिंतकों ने बसंत साहू के जन्मदिन पर केक काटकर इस न्याय का स्वागत किया। इस मौके पर ऑल इंडिया स्माल एंड मीडियम न्यूजपेपर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय सलाहकार प्रितम सिंह भाटिया, पत्रकार सुजित साहू, प्रमुख रामकृष्ण महतो, भाजपा संगठन मंत्री पप्पू वर्मा, चंदन वर्मा, कमल उरांव, रामलाल मांझी और पत्रकार उपेंद्र महतो सहित सैकड़ों गणमान्य लोग मौजूद रहे। 4 साल से अधिक समय तक चली इस कानूनी लड़ाई के बाद आए फैसले ने साबित कर दिया है कि सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं।

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