गले और पीठ का दर्द अब सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं रहा। आज की खराब लाइफस्टाइल, घंटों की सिटिंग और स्मार्टफोन के ओवरयूज़ ने युवाओं को भी इस गंभीर समस्या के जाल में फंसा दिया है। आजकल स्कूल-कॉलेज के स्टूडेंट्स से लेकर वर्किंग प्रोफेशनल्स तक, हर कोई पीठ दर्द और गर्दन की जकड़न से परेशान है।
हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस दर्द की वजह कोई बड़ा एक्सीडेंट नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की 5 खराब आदतें हैं, जो चुपके से हमारी रीढ़ की हड्डी (Spine) को डैमेज कर रही हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में:
1. घंटों लगातार बैठे रहना
चाहे ऑफिस का काम हो या पढ़ाई, लगातार कई घंटों तक एक ही जगह बैठे रहना रीढ़ की हड्डी के लिए सबसे बड़ा दुश्मन है। लगातार सिटिंग से लोअर बैक (कमर के निचले हिस्से) की मसल्स कमजोर हो जाती हैं। इसके कारण शरीर का पूरा वजन सीधे रीढ़ की हड्डी की डिस्क पर आने लगता है, जो आगे चलकर गंभीर दर्द का रूप ले लेता है।
2. स्मार्टफोन का गलत इस्तेमाल और ‘टेक्स्ट नेक’
क्लीवलैंड क्लीनिक के मुताबिक, फोन का इस्तेमाल करते समय गर्दन को आगे की तरफ झुका कर रखने की आदत बेहद खतरनाक है। मेडिकल टर्म में इसे ‘टेक्स्ट नेक’ (Text Neck) कहा जाता है। जब आप स्क्रीन देखने के लिए झुकते हैं, तो गर्दन और ऊपरी रीढ़ पर एक्स्ट्रा लोड पड़ता है, जिससे स्पाइन का नेचुरल अलाइनमेंट बिगड़ जाता है।
3. गलत तरीके से सोना और खराब गद्दे का इस्तेमाल
आपके सोने का तरीका भी रीढ़ की हड्डी की सेहत तय करता है। बहुत ज्यादा ऊंचे तकिए या जरूरत से ज्यादा सॉफ्ट (गद्देदार) बेड का इस्तेमाल करने से सोते समय स्पाइन को सही सपोर्ट नहीं मिल पाता। यही वजह है कि कई लोगों को सुबह उठते ही शरीर और पीठ में भारी जकड़न महसूस होती है।
4. पेट की चर्बी और बढ़ता वजन
बढ़ता हुआ वजन भी रीढ़ की हड्डी का बड़ा दुश्मन है। खासकर पेट के आसपास जमा होने वाला फैट लोअर बैक पर लगातार दबाव बनाए रखता है। इससे रीढ़ की हड्डी को शरीर का संतुलन बनाए रखने के लिए ज्यादा मशक्कत करनी पड़ती है, जिससे दर्द शुरू हो जाता है।
5. भारी सामान उठाने का गलत तरीका
अक्सर लोग जमीन से भारी सामान उठाते वक्त घुटने मोड़ने के बजाय सीधे कमर से नीचे झुक जाते हैं। यह अचानक लगा झटका लोअर बैक इंजरी और स्लिप डिस्क (Slip Disc) के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है।
रीढ़ की हड्डी को सुरक्षित रखने के लिए हर 45 मिनट में सीट से उठकर 5 मिनट का वॉक करें, मोबाइल का इस्तेमाल आई-लेवल (आंखों के सामने) पर रखकर करें और दर्द बढ़ने पर तुरंत डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से संपर्क करें।
