जुगसलाई विधानसभा क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा की राह अब आसान होने वाली है। स्थानीय स्तर पर कॉलेज की वर्षों पुरानी मांग को देखते हुए कोल्हान विश्वविद्यालय ने जुगसलाई में नया महाविद्यालय शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। जब तक कॉलेज का स्थायी भवन बनकर तैयार नहीं हो जाता, तब तक क्षेत्र के ही किसी उपयुक्त विद्यालय भवन में अस्थायी रूप से कक्षाएं संचालित की जाएंगी।
सीनेट की बैठक में विधायक ने उठाया था मुद्दा
यह पूरा मामला कोल्हान विश्वविद्यालय की छठी सीनेट बैठक के दौरान जुगसलाई के विधायक मंगल कालिंदी द्वारा प्रमुखता से उठाया गया था। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को सुझाव दिया था कि भवन निर्माण की प्रक्रिया पूरी होने तक वैकल्पिक व्यवस्था के तहत किसी स्कूल में पढ़ाई शुरू कराई जाए, ताकि स्थानीय छात्र-छात्राओं का साल बर्बाद न हो और उन्हें दूर न जाना पड़े।
कुलपति ने गठित की निरीक्षण समिति
विधायक के इस व्यावहारिक सुझाव पर कुलपति प्रो. डॉ. अंजिला गुप्ता ने त्वरित कार्रवाई की। विश्वविद्यालय की 44वीं शैक्षणिक परिषद की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगाते हुए एक विशेष निरीक्षण समिति का गठन कर दिया गया है। यह समिति जुगसलाई क्षेत्र के संभावित स्कूल भवनों का दौरा कर वहां उपलब्ध आधारभूत संरचना का आकलन करेगी।
- कक्षाओं की पर्याप्त संख्या
- बेंच, डेस्क और अन्य जरूरी फर्नीचर
- पेयजल और शौचालय की व्यवस्था
- सुरक्षा और आवागमन के साधन
इसी शैक्षणिक सत्र से नामांकन की योजना
विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक, निरीक्षण समिति की रिपोर्ट मिलते ही आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। विश्वविद्यालय का लक्ष्य इसी वर्तमान शैक्षणिक सत्र से ही नामांकन प्रक्रिया शुरू करने का है।
वर्तमान में जुगसलाई और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए जमशेदपुर मुख्य शहर या अन्य जिलों का रुख करना पड़ता है। इस कॉलेज के खुलने से न सिर्फ विद्यार्थियों का समय बचेगा, बल्कि उनके परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ भी कम होगा।
उच्च शिक्षा का बढ़ेगा दायरा: मंगल कालिंदी
विश्वविद्यालय के इस त्वरित निर्णय का स्वागत करते हुए विधायक मंगल कालिंदी ने कहा: “यह जुगसलाई की जनता और युवाओं की जीत है। स्थानीय स्तर पर कॉलेज खुलने से क्षेत्र में उच्च शिक्षा का दायरा बढ़ेगा और विशेषकर हमारी बेटियों को आगे की पढ़ाई जारी रखने में सहूलियत होगी। मैं इस निर्णय के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन का आभार व्यक्त करता हूँ।”
