झारखंड पुलिस की कमान संभालने के बाद पहली बार पलामू प्रमंडल के दौरे पर पहुंचीं पुलिस महानिदेशक तदाशा मिश्रा ने शुक्रवार को कानून-व्यवस्था को लेकर एक हाईलेवल समीक्षा बैठक की। पलामू, लातेहार और गढ़वा जिले की सुरक्षा व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और नक्सल विरोधी अभियानों की बारीकी से समीक्षा करते हुए डीजीपी ने उग्रवादियों और संगठित अपराधियों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाने का कड़ा निर्देश दिया।
बैठक में शामिल हुए पुलिस महकमे के दिग्गज
पलामू में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में पुलिस के कई आला अधिकारी मौजूद रहे। इसमें मुख्य रूप से:
- नरेंद्र कुमार सिंह (आईजी, अभियान)
- अजय लिंडा (आईजी, सीआईडी)
- किशोर कौशल (डीआईजी, पलामू प्रक्षेत्र)
- कपिल चौधरी (एसपी, पलामू)
- कुमार गौरव (एसपी, लातेहार)
- आशुतोष शेखर (एसपी, गढ़वा)
अपराध नियंत्रण और लंबित मामलों पर विशेष फोकस
डीजीपी तदाशा मिश्रा ने तीनों जिलों के पुलिस कप्तानों के साथ अलग-अलग और विस्तृत चर्चा की। बैठक में हत्या, लूट, रंगदारी और संगठित आपराधिक गिरोहों के खिलाफ चल रही कार्रवाई का फीडबैक लिया गया। इसके साथ ही लंबे समय से लंबित कांडों की जांच में तेजी लाने, कोर्ट वारंट का त्वरित निष्पादन करने और फरार चल रहे अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया गया।
नक्सल प्रभावित इलाकों में तेज होंगे अभियान
प्रमंडल के भौगोलिक परिदृश्य को देखते हुए नक्सल विरोधी अभियानों और खुफिया तंत्र को और अधिक मजबूत करने पर विशेष मंथन हुआ। डीजीपी ने स्पष्ट किया कि:
“उग्रवाद प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस और सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ाई जाए। नक्सलियों और उनके मददगारों के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए अभियानों में तेजी लाएं, साथ ही आम जनता के बीच सुरक्षा का भरोसा मजबूत करने के लिए बेहतर समन्वय स्थापित करें।”
डीजीपी की इस कड़क समीक्षा के बाद माना जा रहा है कि पलामू प्रमंडल के तीनों जिलों में पुलिसिंग का एक नया और आक्रामक रूप देखने को मिलेगा। संवेदनशील थाना क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने, तकनीकी सर्विलांस का उपयोग करने और अपराधियों के आर्थिक स्रोतों पर चोट करने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया गया है।
