हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल ज्येष्ठ अधिकमास की पूर्णिमा का व्रत 31 मई 2026 को रखा जा रहा है। अधिकमास में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता है, क्योंकि इसे पूरे महीने का सबसे श्रेष्ठ और फलदायी दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया जप, तप, पूजन और दान कभी न खत्म होने वाला पुण्य प्रदान करता है।
आइए जानते हैं इस दिन बनने वाले शुभ संयोग, पूजा विधि और किस्मत बदलने वाले महादान के बारे में।
बन रहे हैं 2 दुर्लभ संयोग (शिव और सिद्ध योग)
इस साल अधिकमास पूर्णिमा पर शिव योग और सिद्ध योग का एक साथ निर्माण हो रहा है। इन अत्यंत शुभ और दुर्लभ योगों में भगवान विष्णु (श्रीहरि) और माता लक्ष्मी की पूजा करने से हर कार्य में सफलता मिलती है। रुके हुए काम गति पकड़ते हैं और धन प्राप्ति के नए मार्ग खुलते हैं।
सुख-समृद्धि के लिए घर में कराएं सत्यनारायण कथा
पूर्णिमा के दिन नारायण की सेवा करने से मनुष्य के समस्त पापों का नाश हो जाता है। इस दिन घर में भगवान सत्यनारायण की कथा का आयोजन करना बेहद शुभ माना गया है। इससे न केवल गृहक्लेश दूर होते हैं और शांति आती है, बल्कि परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है।
स्कन्द पुराण में भी कहा गया है: सत्यनारायणं देवं वन्देऽहं कामदं प्रभुम्। लीलया विततं विश्वं येन तस्मै नमो नमः।। अर्थ: सत्यस्वरूप भगवान नारायण समस्त इच्छाओं को पूर्ण करने वाले हैं। उनका स्मरण और व्रत मनुष्य के सभी कष्टों को दूर कर देता है।
33 की संख्या में करें दान, पलट जाएगी किस्मत
अधिकमास पूर्णिमा पर ’33’ की संख्या का विशेष महत्व है। इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार नीचे दी गई चीजों को 33 की संख्या में दान करने से श्रीहरि अत्यंत प्रसन्न होते हैं और घर में कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती:
- 33 फल (जैसे केले, आम या कोई भी मौसमी फल)
- 33 मालपुए (अधिकमास में मालपुए का दान सर्वोत्तम माना गया है)
- 33 वस्त्र (जरूरतमंदों को कपड़े दान करें)
- 33 पुस्तकें या धार्मिक ग्रंथ
यदि आप इस शुभ संयोग पर पूरी श्रद्धा से पूजा और दान करते हैं, तो भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा से आपकी सोई हुई किस्मत भी जाग सकती है।
