पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा-पोड़ाहाट क्षेत्र में बचे हुए माओवादियों के खिलाफ अभियान को निर्णायक चरण में पहुंचाने के लिए शुक्रवार को सीआरपीएफ के महानिदेशक (डीजी) ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने चाईबासा में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा और असीम मंडल समेत सक्रिय बचे हुए उग्रवादियों की घेराबंदी और सफाये की अंतिम रणनीति पर चर्चा कर आगे की कार्ययोजना तय की गई।
चाईबासा एसपी कार्यालय के सभागार में हुई इस गोपनीय बैठक में सीआरपीएफ आईजी साकेत सिंह, ऑपरेशन आईजी नरेंद्र सिंह, झारखंड-जगुआर के डीआईजी इंद्रजीत महथा, कोल्हान प्रमंडल के डीआईजी अनुरंजन किस्पोट्टा, पश्चिमी सिंहभूम के एसपी अमित रेनू सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में क्षेत्र में चल रहे नक्सल विरोधी अभियानों की समीक्षा करते हुए उग्रवाद के पूर्ण उन्मूलन के लिए रणनीति को अंतिम रूप दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, सारंडा क्षेत्र में लगातार सुरक्षा बलों की कार्रवाई और मुठभेड़ों के बाद एक करोड़ के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा का नेटवर्क काफी कमजोर पड़ चुका है। वहीं असीम मंडल के पश्चिम बंगाल की ओर सक्रिय होने की सूचना है। हाल ही में सांगेन अंगारिया समेत 25 नक्सलियों के आत्मसमर्पण से संगठन को बड़ा झटका लगा है, जिससे सुरक्षा बलों को अभियान में और बढ़त मिली है। बैठक के बाद सीआरपीएफ डीजी ने क्षेत्र में तैनात जवानों का हौसला बढ़ाया और उनके योगदान की सराहना की। इसी क्रम में उन्होंने वर्ष 2023 में सारंडा जंगल में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान लापता हुए सीआरपीएफ कांस्टेबल बादल मुर्मू के परिवार से भी मुलाकात की।
डीजी ने चाईबासा में कांस्टेबल बादल मुर्मू की पत्नी झानो मुर्मू से मिलकर परिवार को हरसंभव सहायता का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ जवान के लापता होने से जुड़ी परिस्थितियों की सच्चाई सामने लाने के लिए हरसंभव प्रयास जारी रखेगी। साथ ही बच्चों की शिक्षा और परिवार की अन्य आवश्यक जरूरतों के लिए भी पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया। सीआरपीएफ डीजी के इस दौरे को एक ओर जहां नक्सल उन्मूलन अभियान को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर जवानों और उनके परिवारों के प्रति संगठन की संवेदनशीलता का भी महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।
