झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने बांग्लादेशी घुसपैठ और संथाल परगना क्षेत्र की बदलती जनसंख्या संरचना को लेकर एक बार फिर बड़ा और तीखा बयान दिया है। पाकुड़ के सिंधीपाड़ा स्थित सिंधी पंचायत भवन में आयोजित भारतीय जनता पार्टी के पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे मरांडी ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा।
उन्होंने साफ तौर पर कहा कि पश्चिम बंगाल और झारखंड, खासकर संथाल परगना के इलाकों में जिस तेजी से आबादी का संतुलन बिगड़ रहा है, वह बेहद चिंताजनक है। इसी को ध्यान में रखते हुए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है, जो इस डेमोग्राफी चेंज के मुख्य कारणों की गहन जांच करेगी।
बाबूलाल मरांडी ने पेश किए आबादी के चौंकाने वाले आंकड़े
नेता प्रतिपक्ष ने जनसंख्या के आंकड़ों का हवाला देते हुए स्थिति को गंभीर बताया। उन्होंने कहा:
- आदिवासी आबादी में गिरावट: वर्ष 1951 में संथाल परगना में आदिवासी समाज की आबादी लगभग 44 प्रतिशत थी, जो अब घटकर महज 28 प्रतिशत के करीब रह गई है।
- मुस्लिम आबादी में बढ़त: इसके विपरीत, 1951 में जो मुस्लिम आबादी करीब 9 प्रतिशत थी, वह वर्तमान में बढ़कर लगभग 22 प्रतिशत हो चुकी है।
मरांडी ने आरोप लगाया कि संथाल परगना की सीमाएं पश्चिम बंगाल से सटी हैं और बंगाल की सीमा बांग्लादेश से लगती है। इसी भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर बड़े पैमाने पर घुसपैठिए यहां दाखिल हुए हैं और स्थानीय संसाधनों व जमीन पर कब्जा कर रहे हैं।
घुसपैठियों को बाहर निकालने के लिए दोहरी रणनीति
अवैध प्रवासियों की पहचान को लेकर बाबूलाल मरांडी ने स्पष्ट रूप से दो बातें कहीं:
- वर्ष 2003 के बाद आए घुसपैठिए: इनकी पहचान एसआईआर प्रक्रिया के जरिए आसानी से हो जाएगी।
- वर्ष 2003 से पहले आए घुसपैठिए: इस अवधि से पहले आकर बसे लोगों को चिन्हित करने के लिए केंद्र सरकार को एनआरसी (NRC) लागू करना पड़ेगा।
“केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी कई बार सार्वजनिक मंचों से यह संकल्प दोहरा चुके हैं कि झारखंड की पावन भूमि से एक-एक बांग्लादेशी घुसपैठिए को चुन-चुनकर चिन्हित किया जाएगा और उन्हें देश से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।” — बाबूलाल मरांडी, नेता प्रतिपक्ष
