वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बेहद शानदार खबर आई है। विश्व आर्थिक मंच की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 12 महीनों में भारत दुनिया की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहेगा और वैश्विक विकास की रफ्तार को आगे बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभाएगा। हालांकि, रिपोर्ट में महंगाई को लेकर अलर्ट भी जारी किया गया है।
52% मुख्य अर्थशास्त्रियों को भारत पर भरोसा
WEF के सर्वे में दुनिया भर के शीर्ष अर्थशास्त्रियों ने भारत की आर्थिक रफ्तार को लेकर बेहद सकारात्मक रुख दिखाया है:
- मजबूत आर्थिक वृद्धि: सर्वे में शामिल 52 प्रतिशत चीफ इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि अगले एक साल में भारत की जीडीपी ग्रोथ “मजबूत” या “बहुत मजबूत” रहने वाली है।
- विकास के पीछे की वजह: भारत की मजबूत घरेलू मांग , इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश, तेज आर्थिक गतिविधियां, नए द्विपक्षीय व्यापार समझौते और सरकारी नीतियां इसकी सबसे बड़ी वजह हैं।
- अमेरिका और भारत का दबदबा: रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत और अमेरिका, दो ऐसी अर्थव्यवस्थाएं हैं जो मजबूती से टिकी रहेंगी।
भारत के लिए बड़ी चुनौती: महंगाई और ऊर्जा लागत
जहाँ एक तरफ विकास की रफ्तार तेज रहेगी, वहीं WEF ने भारत सरकार और नीति निर्माताओं के लिए एक बड़ी चेतावनी भी जारी की है:
- महंगाई का खतरा: सर्वे में शामिल 61 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आने वाले समय में भारत में महंगाई दर ऊंची बनी रह सकती है।
- ऊर्जा संकट का दबाव: कच्चे तेल और ऊर्जा की कीमतों में संभावित उछाल भारतीय बाजार और आम जनता की जेब पर दबाव बढ़ा सकता है।
दुनिया भर में मंदी का डर, लेकिन भारत सुरक्षित!
रिपोर्ट में वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर कई चिंताजनक बातें कही गई हैं, जिनके बीच भारत एक चमकता हुआ सितारा नजर आता है:
| वैश्विक स्थिति | भारत की स्थिति |
| यूरोप में मंदी और महंगाई का दबाव लगातार बढ़ रहा है। | भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के देश अपेक्षाकृत बेहतर और सुरक्षित स्थिति में हैं। |
| मिडिल ईस्ट और उत्तरी अफ्रीका में विकास दर में भारी गिरावट की आशंका है। | भारत में मजबूत घरेलू मांग के कारण विकास दर स्थिर बनी रहेगी। |
| 89% अर्थशास्त्रियों का मानना है कि पश्चिम एशिया तनाव के कारण वैश्विक विकास कमजोर होगा। | मंदी की वैश्विक संभावना महज 13% है, जिसमें भारत सबसे मजबूत रहेगा। |
क्यों बढ़ रहा है वैश्विक संकट? पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और ‘होर्मुज स्ट्रेट’ में पैदा हुए जोखिमों के कारण सप्लाई चेन बाधित हो रही है। इससे दुनिया भर में ऊर्जा, खाद्यान्न और उर्वरक की आपूर्ति प्रभावित होने की 94% आशंका है।
