सरायकेला: ‘सेटिंग’ के खेल में 100 बच्चों का भविष्य अधर में! मध्य विद्यालय दुलमी में 5 में से 2 शिक्षक सालों से डेपुटेशन पर, एक अनफिट

कागज़ पर पांच, धरातल पर दो शिक्षक; सरायकेला के सरकारी स्कूल में बच्चों के भविष्य से खिलवाड़!

Johar News Times
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झारखंड की शिक्षा व्यवस्था को खोखला कर रहे डेपुटेशन के खेल का एक बड़ा मामला सरायकेला-खरसावां जिले से सामने आया है। कुकड़ू प्रखंड के ओड़िया पंचायत अंतर्गत ‘मध्य विद्यालय दुलमी’ में शिक्षकों के टोटे के कारण पढ़ाई पूरी तरह चरमरा गई है। स्कूल में 5 पद स्वीकृत हैं, लेकिन धरातल पर महज 2 शिक्षकों के भरोसे कक्षा 1 से 8 तक के 100 से अधिक नौनिहालों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है।

हैरानी की बात यह है कि शिक्षा विभाग के नियमों को ताक पर रखकर यहाँ के शिक्षक सालों से दूसरे स्कूलों में ऐश कर रहे हैं और उनका वेतन इसी स्कूल से निकाला जा रहा है।


  • नियमतः डेपुटेशन अधिकतम 3 महीने का होता है, लेकिन यहाँ शिक्षक 5 साल से गायब हैं।
  • शिक्षक पप्पू रजक 2021 से और दिनेश नाग 2024 से डेपुटेशन पर बाहर, पर वेतन दुलमी स्कूल से जारी।
  • एक शिक्षक बीमारी के कारण अनफिट, सिर्फ दो शिक्षकों के कंधों पर 100 बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा।
  • समाजसेवी गौरांग दत्ता ने जिला शिक्षा अधीक्षक से की उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग।

शिक्षा विभाग के कड़े दिशा-निर्देशों के मुताबिक किसी भी शिक्षक को विशेष परिस्थिति में अधिकतम 3 महीने के लिए ही डेपुटेशन पर भेजा जा सकता है। अवधि खत्म होते ही उन्हें मूल स्कूल लौटना होता है।

लेकिन दुलमी मध्य विद्यालय में यह नियम बेअसर है। शिक्षक पप्पू रजक साल 2021 में डेपुटेशन पर गए थे और पिछले 5 सालों से वापस नहीं लौटे। वहीं, दूसरे शिक्षक दिनेश नाग भी साल 2024 से बाहर जमे हैं। इस ‘रसूख’ और ‘सेटिंग’ के चलते स्कूल में सिर्फ दो ही शिक्षक बचे हैं, क्योंकि एक अन्य शिक्षक लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे हैं।

स्कूल की इस बदहाली पर क्षेत्र के मुखर समाजसेवी सह पूर्व वार्ड पार्षद गौरांग दत्ता ने शिक्षा विभाग को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने तीखा सवाल उठाते हुए कहा:

“यह कैसी व्यवस्था है जहाँ बच्चों के भविष्य की बलि देकर शिक्षकों को मनचाही जगह पोस्टिंग दी जा रही है? इन शिक्षकों ने विभाग में ऐसी क्या सेटिंग कर रखी है कि 3 महीने का डेपुटेशन सालों-साल खिंच रहा है? स्कूल से सिर्फ वेतन उठ रहा है, योगदान शून्य है।”

गौरांग दत्ता ने जिला शिक्षा अधीक्षक से मामले की उच्चस्तरीय जांच करने, दोनों शिक्षकों को तुरंत वापस बुलाने और इस पूरे कार्यकाल के दौरान हुए वेतन भुगतान की जांच करने की मांग की है। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्कूल में शिक्षकों की वापसी नहीं हुई, तो वे ग्रामीणों और अभिभावकों को एकजुट कर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

इस गंभीर मामले पर फिलहाल प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी से संपर्क नहीं हो पाया है, लेकिन ग्रामीणों में इस प्रशासनिक लापरवाही को लेकर भारी आक्रोश है।

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