बुलियन बैंक: क्या घरों और मंदिरों का निष्क्रिय सोना बनेगा देश की आर्थिक ताकत? AIJGF ने सरकार को दिया बड़ा सुझाव

घरों में बंद सोने को मिलेगी नई रफ़्तार, क्या बदलेगी देश की साख?

Johar News Times
3 Min Read

भारत के प्रमुख ज्वेलर्स संगठन ‘ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन’ ने केंद्र सरकार के सामने एक बेहद महत्वाकांक्षी प्रस्ताव रखा है। संगठन ने देश में ‘बुलियन बैंक’ यानी एक विशेष गोल्ड बैंकिंग सिस्टम शुरू करने का सुझाव दिया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारतीय घरों, मंदिरों और गोल्ड ETF में पड़े टन-दर-टन निष्क्रियसोने को देश की औपचारिक वित्तीय प्रणाली का हिस्सा बनाना है।

इंपोर्ट बिल और विदेशी मुद्रा का बचेगा भारी पैसा भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयातक देशों में शुमार है। शादी-ब्याह और त्योहारों के सीजन में यहाँ सोने की रिकॉर्ड खरीदारी होती है, जिसके कारण हर साल अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा सिर्फ सोने के आयात पर खर्च हो जाती है। इससे देश की अर्थव्यवस्था और व्यापार घाटे पर भारी दबाव बनता है।

AIJGF ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को भेजे गए प्रस्ताव में तर्क दिया है कि यदि देश के भीतर ही मौजूद सोने को रेगुलेटेड सिस्टम के जरिए बाजार में रोटेट किया जाए, तो विदेशों से सोना मंगाने की निर्भरता काफी हद तक कम हो सकती है।

प्रस्तावित मॉडल के अनुसार, आम लोग या धार्मिक संस्थान अपने पास रखे सोने को बैंक में सुरक्षित जमा करा सकेंगे। इसके बदले उन्हें तय ब्याज या अन्य वित्तीय लाभ दिए जाएंगे।

  • बैंक में जमा इस सोने को ज्वेलर्स, रिफाइनर्स और एक्सपोर्टर्स को कारोबार के लिए लोन या लीज पर दिया जा सकेगा। इससे बाजार में लिक्विडिटी बढ़ेगी और कच्चे माल की लागत कम होगी।
  • संगठन ने यह भी सुझाव दिया है कि गोल्ड ETFs को अपने फिजिकल गोल्ड स्टॉक का एक निश्चित हिस्सा नियंत्रित तरीके से उधार देने की अनुमति मिले, जिससे घरेलू बाजार में सोने की उपलब्धता आसान हो सके।

चुनौतियां भी हैं बड़ी हालांकि, इस योजना को जमीन पर उतारना एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है। भारत में सोने के साथ लोगों का गहरा भावनात्मक और धार्मिक जुड़ाव है, और लोग पारंपरिक रूप से इसे अपने पास रखना ही सुरक्षित मानते हैं। ऐसे में सरकार के लिए लोगों का भरोसा जीतना, मजबूत नियम बनाना और सोने की शुद्धता व सुरक्षा की पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करना सबसे अहम होगा। फिलहाल सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन आर्थिक मोर्चे पर यह प्रस्ताव आने वाले दिनों में बड़ी बहस का विषय बन सकता है।

Share This Article