दुनियाभर में बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच एक नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अलग-अलग देशों में आम लोगों की कमाई का कितना हिस्सा केवल पेट्रोल भरवाने में खर्च हो जाता है। वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के आधार पर तैयार “गैसोलीन अफोर्डेबिलिटी” रिपोर्ट में यह तुलना की गई है कि 40 लीटर पेट्रोल खरीदने में किसी देश के नागरिक की मासिक आय का कितना प्रतिशत खर्च होता है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पड़ोसी देशों म्यांमार, पाकिस्तान और नेपाल की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है। इन देशों में 40 लीटर पेट्रोल भरवाने के लिए लोगों को अपनी मासिक आय का लगभग 47 प्रतिशत से 52 प्रतिशत तक खर्च करना पड़ सकता है। यानी कई परिवारों की आधी कमाई केवल पेट्रोल पर ही चली जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन देशों में औसत आय कम होने और पेट्रोल की कीमत अधिक रहने के कारण निजी वाहन चलाना आम लोगों के लिए बड़ा आर्थिक बोझ बन गया है। रिपोर्ट में भारत की स्थिति भी पूरी तरह राहत देने वाली नहीं बताई गई है। आंकड़ों के मुताबिक भारत में 40 लीटर पेट्रोल भरवाने में औसतन मासिक आय का लगभग 8 से 10 प्रतिशत हिस्सा खर्च हो सकता है। यानी मध्यम आय वर्ग के लोगों के बजट पर पेट्रोल की कीमतों का सीधा असर पड़ता है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यदि कोई व्यक्ति महीने में 20 हजार रुपये कमाता है और उसकी आय का 10 प्रतिशत पेट्रोल पर खर्च होता है, तो उसे लगभग 2 हजार रुपये केवल एक बार टैंक भरवाने में खर्च करने पड़ सकते हैं।दूसरी ओर, कतर और कुवैत जैसे तेल उत्पादक देशों में 40 लीटर पेट्रोल भरवाने में लोगों की मासिक आय का केवल 1 से 2 प्रतिशत हिस्सा ही खर्च होता है। इसी तरह यूनाइटेड स्टेट्स, सउदी अरबिया और लक्समबर्ग भी उन देशों में शामिल हैं, जहां लोगों की आय अधिक और पेट्रोल अपेक्षाकृत सस्ता माना जाता है। रिपोर्ट में यूरोपीय देशों का भी उल्लेख किया गया है। नॉर्वे, स्विट्जरलैंड और जर्मनी में पेट्रोल की कीमतें भले ही अधिक हों, लेकिन वहां लोगों की आय भी काफी ज्यादा है। ऐसे में 40 लीटर पेट्रोल भरवाने पर मासिक आय का केवल 2 से 4 प्रतिशत हिस्सा ही खर्च होता है, जिससे आर्थिक दबाव अपेक्षाकृत कम रहता है।विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोल की वास्तविक महंगाई केवल उसकी कीमत से नहीं, बल्कि लोगों की आय के मुकाबले उसके खर्च से तय होती है।
