तेल-एलपीजी के बाद अब इंटरनेट संकट का खतरा, होर्मुज में सबसी केबल्स पर मंडराया खतरा

तेल-एलपीजी के बाद अब इंटरनेट संकट का खतरा, होर्मुज में सबसी केबल्स पर मंडराया खतरा

Johar News Times
3 Min Read

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच अब वैश्विक इंटरनेट सेवाओं पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच ऐसी आशंका जताई जा रही है कि ईरान समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबल्स को नया रणनीतिक हथियार बना सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने हाल ही में उन सबसी फाइबर-ऑप्टिक केबल्स को लेकर कड़ा रुख अपनाया है, जिनके जरिए खाड़ी देशों, एशिया और यूरोप के बीच डेटा ट्रांसफर होता है। बताया जा रहा है कि ईरान इन केबल्स के इस्तेमाल पर बड़ी टेक कंपनियों से “टोल टैक्स” वसूलने की तैयारी कर रहा है।

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़े प्रवक्ता इब्राहिम जोलफघारी ने सोशल मीडिया पर संकेत देते हुए कहा कि इंटरनेट केबल्स के उपयोग पर शुल्क लगाया जाएगा। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि Google, Microsoft, Meta और Amazon जैसी कंपनियों से भारी शुल्क लिया जा सकता है। साथ ही इन केबल्स की मरम्मत और रखरखाव का काम केवल ईरानी कंपनियों को दिए जाने की बात भी सामने आई है। जानकारी के मुताबिक, होर्मुज क्षेत्र के नीचे कई महत्वपूर्ण इंटरनेट केबल नेटवर्क गुजरते हैं। इनमें एएई-1 नेटवर्क दक्षिण-पूर्व एशिया को मिस्र के रास्ते यूरोप से जोड़ता है, जबकि फाल्कन नेटवर्क भारत और श्रीलंका को खाड़ी देशों से जोड़ने का काम करता है। इसके अलावा गल्फ ब्रिज इंटरनेशनल नेटवर्क पूरे खाड़ी क्षेत्र की डिजिटल कनेक्टिविटी की अहम कड़ी माना जाता है।

इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन के अनुसार, दुनिया का लगभग 99 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट ट्रैफिक इन्हीं सबसी फाइबर-ऑप्टिक केबल्स के जरिए संचालित होता है। यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत और सऊदी अरब जैसे देशों के लिए ये केबल्स डिजिटल लाइफलाइन मानी जाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इन केबल्स को नुकसान पहुंचता है या इंटरनेट ट्रैफिक बाधित होता है, तो इंटरनेट स्पीड पर गंभीर असर पड़ सकता है। ऑनलाइन बैंकिंग, क्लाउड सेवाएं और वैश्विक डिजिटल कारोबार प्रभावित हो सकते हैं, जिससे अरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान होने की आशंका है।

टेलीकॉम विशेषज्ञों के मुताबिक, फिलहाल इन सबसी केबल्स का कोई प्रभावी विकल्प मौजूद नहीं है। सैटेलाइट आधारित नेटवर्क, जैसे स्टर्लिंक, सीमित स्तर पर मदद कर सकते हैं, लेकिन वैश्विक स्तर पर भारी डेटा ट्रैफिक संभालना उनके लिए संभव नहीं माना जाता।इस बीच पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त चेतावनी दी है, जबकि रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका जल्द ही ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई पर विचार कर सकता है। ऐसे में तेल और गैस संकट के बाद अब इंटरनेट सेवाओं पर भी वैश्विक चिंता बढ़ती जा रही है।

Share This Article