झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के घने सारंडा जंगल में आईईडी विस्फोट की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हुए दंतैल हाथी ने आखिरकार दम तोड़ दिया। पिछले करीब दस दिनों से वन विभाग की मेडिकल टीम घायल हाथी को बचाने के लिए लगातार इलाज कर रही थी, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हो सका।
जानकारी के अनुसार, कोयना वन क्षेत्र के कोलबोंगा इलाके में यह हाथी नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी पर चढ़ गया था। विस्फोट में उसके अगले पैर में गंभीर चोट और फ्रैक्चर हो गया था। घायल होने के बाद हाथी जंगल के एक नाले के पास पड़ा मिला, जहां वन विभाग ने विशेष निगरानी में उसका उपचार शुरू किया। मौके पर तीन पशु चिकित्सकों की टीम तैनात की गई थी।
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, हाथी को प्रतिदिन फल, सब्जियां और अन्य भोजन दिया जा रहा था। उसे दवाइयों और इंजेक्शन के जरिए बचाने की कोशिश की गई, लेकिन संक्रमण और गंभीर चोट के कारण उसकी स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। शुक्रवार को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। अब वन विभाग की टीम पोस्टमार्टम के बाद जंगल क्षेत्र में ही अंतिम संस्कार की तैयारी में जुटी है।
सारंडा जंगल में आईईडी विस्फोट अब वन्यजीवों के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। वन विभाग के अनुसार, पिछले एक वर्ष में इस तरह की घटनाओं में अब तक छह हाथियों की मौत हो चुकी है। सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए जंगलों में लगाए गए विस्फोटक अब बेकसूर वन्यजीवों की जान ले रहे हैं। लगातार हो रही घटनाओं ने वन विभाग और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है।
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