Jharkhand के Saraikela जिले के चांडिल बांध विस्थापित एवं प्रभावित क्षेत्रों में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि हाथियों के झुंड आए दिन गांवों में घुसकर घरों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, फसलों को बर्बाद कर रहे हैं और लोगों की जान-माल को खतरा पैदा कर रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन ने वन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
मंच के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने कहा कि चांडिल, चौका, कुकड़ू और आसपास के इलाकों में ग्रामीण लंबे समय से हाथियों के भय में जी रहे हैं। रात होते ही गांवों में दहशत का माहौल बन जाता है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, महिलाएं खेतों में जाने से डर रही हैं और किसान अपनी फसलों की सुरक्षा को लेकर परेशान हैं।
हाल के वर्षों में चांडिल वन क्षेत्र में हाथियों के हमले और नुकसान की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरायकेला वन प्रमंडल में पिछले 25 वर्षों में हाथी हमलों में 170 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि जंगलों में पानी और भोजन की कमी, हाथी कॉरिडोर में अतिक्रमण और वन क्षेत्रों के सिकुड़ने के कारण हाथी बार-बार गांवों की ओर आ रहे हैं। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि हाथी कॉरिडोर बाधित होने से मानव-हाथी संघर्ष बढ़ता है।
विस्थापित अधिकार मंच ने सरकार से मांग की है कि हाथी कॉरिडोर को सुरक्षित किया जाए, जंगलों में पानी और चारे की व्यवस्था हो, गांवों में माइकिंग एवं अलर्ट सिस्टम लगाया जाए और प्रभावित परिवारों को समय पर मुआवजा दिया जाए। साथ ही संवेदनशील गांवों को रेड जोन घोषित कर स्थायी सुरक्षा योजना लागू करने की मांग भी उठाई गई है।
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