गुड़ाबांदा: पूर्वी सिंहभूम जिले की सरकारी शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। गुड़ाबांदा की प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी (BEEO) अनिता सिन्हा के 30 अप्रैल को सेवानिवृत्त होने के बाद विभाग ने तेजेंद्र कौर को नया प्रभार सौंपा है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि उन्हें केवल गुड़ाबांदा ही नहीं, बल्कि जिले के 13 बीआरसी का अतिरिक्त जिम्मा भी दे दिया गया है। इनमें जमशेदपुर 1 एवं 2, बोड़ाम, पटमदा, चाकुलिया, मुसाबनी, घाटशिला, डुमरिया, पोटका 1 एवं 2, बहरागोड़ा 1 एवं 2 तथा धालभूमगढ़ शामिल हैं। बताया जा रहा है कि उनकी मूल पोस्टिंग जमशेदपुर-2 में है।
विभागीय कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
एक ही अधिकारी को जिले के सभी प्रमुख प्रखंडों की जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद स्थानीय लोगों, अभिभावकों और शिक्षा से जुड़े बुद्धिजीवियों ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यह व्यवस्था शिक्षा सुधार के बजाय व्यवस्था को और कमजोर कर सकती है। बीईईओ की जिम्मेदारी केवल कार्यालय संचालन तक सीमित नहीं होती। उन्हें स्कूल निरीक्षण, शिक्षकों की उपस्थिति, वेतन संबंधी मामलों की निगरानी, शैक्षणिक गतिविधियों की समीक्षा, खेलकूद कार्यक्रम, बीआरसी संचालन और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन जैसी जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं।
“6 दिन में 13 बीआरसी कैसे संभालेंगी?”
स्थानीय लोगों का कहना है कि सप्ताह में केवल छह कार्य दिवस होने के बावजूद एक अधिकारी के लिए करीब 120 किलोमीटर के दायरे में फैले सभी स्कूलों और प्रखंडों का प्रभावी निरीक्षण करना लगभग असंभव है। ग्रामीणों ने चिंता जताई कि जब अधिकारी नियमित रूप से स्कूलों तक पहुंच ही नहीं पाएंगे, तो शिक्षकों की जवाबदेही कैसे तय होगी। विशेष रूप से गुड़ाबांदा, डुमरिया और बहरागोड़ा जैसे ग्रामीण इलाकों के कई विद्यालय पहले से ही शिक्षकों की कमी और बदहाल शैक्षणिक माहौल से जूझ रहे हैं।
अभिभावकों में नाराजगी
अभिभावकों का कहना है कि सरकारी स्कूलों की स्थिति पहले से ही चिंताजनक है। यदि विभाग अस्थायी व्यवस्था के भरोसे शिक्षा व्यवस्था चलाता रहा, तो गांव के बच्चों का भविष्य प्रभावित होगा।स्थानीय लोगों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि प्रत्येक प्रखंड में अलग और स्थायी बीईईओ की नियुक्ति की जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सके।
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