पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब सुवेंदु अधिकारी ने राज्य के पहले भारतीय जनता पार्टी मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर नया राजनीतिक अध्याय लिख दिया। कोलकाता में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल आर.एन. रवि ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। सुवेंदु अधिकारी ने बांग्ला भाषा में ईश्वर के नाम की शपथ ली और शपथ ग्रहण के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास पहुंचकर झुककर प्रणाम किया। यह दृश्य समारोह का सबसे चर्चित और भावुक क्षण बन गया।

भाजपा की यह जीत केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की दशकों पुरानी राजनीतिक धारा में बड़े बदलाव के रूप में देखी जा रही है। विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 207 सीटों पर जीत दर्ज कर तृणमूल कांग्रेस के लंबे शासन का अंत कर दिया। भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी को हराने वाले सुवेंदु अधिकारी अब बंगाल की सत्ता की कमान संभाल चुके हैं।
टैगोर को नमन से शुरू हुआ समारोह
कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देकर की। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने भाजपा के 98 वर्षीय वरिष्ठ कार्यकर्ता माखनलाल सरकार का विशेष सम्मान किया। मंच पर पहुंचते ही प्रधानमंत्री सीधे उनके पास गए, उन्हें शॉल ओढ़ाया और सम्मान स्वरूप उनके पैर भी छुए। यह दृश्य पूरे समारोह में आकर्षण का केंद्र रहा।
इन नेताओं ने भी ली मंत्री पद की शपथ
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के साथ पांच अन्य नेताओं ने भी मंत्री पद की शपथ ली। सभी नेताओं ने बांग्ला भाषा में शपथ ग्रहण किया।
१. दिलीप घोष
खड़गपुर सदर सीट से दूसरी बार विधायक बने दिलीप घोष भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। वे मेदिनीपुर लोकसभा सीट से सांसद रह चुके हैं और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष तथा महासचिव की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। उन्होंने इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया है।

२. अग्निमित्रा पॉल
आसनसोल दक्षिण विधानसभा सीट से विधायक अग्निमित्रा पॉल ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की है। वर्ष 2021 में पहली बार विधायक बनने के बाद उन्होंने 2022 का आसनसोल लोकसभा उपचुनाव और 2024 का मेदिनीपुर लोकसभा चुनाव भी लड़ा था, हालांकि दोनों में हार का सामना करना पड़ा था।

३. अशोक कीर्तनिया
बनगांव उत्तर सीट से विधायक अशोक कीर्तनिया मतुआ समुदाय से आते हैं। 52 वर्षीय अशोक राजनीति के साथ-साथ व्यवसाय से भी जुड़े रहे हैं और सीमावर्ती इलाकों में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।
४. खुदीराम टुडू
रानीबांध (अनुसूचित जनजाति) सीट से विधायक खुदीराम टुडू पेशे से शिक्षक रहे हैं। उन्होंने 2026 के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार तनुश्री हांसदा को हराकर जीत दर्ज की। आदिवासी क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने में उनकी अहम भूमिका रही है।
५. निषिथ प्रमाणिक
मथाभांगा सीट से पहली बार विधायक बने निषिथ प्रमाणिक इससे पहले कूचबिहार लोकसभा सीट से सांसद रह चुके हैं। केंद्र सरकार में वे गृह राज्य मंत्री तथा युवा मामले एवं खेल मंत्रालय में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
देशभर के दिग्गज नेताओं की मौजूदगी
इस ऐतिहासिक समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन और भाजपा शासित राज्यों के करीब 20 मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री शामिल हुए। समारोह में देशभर से आए नेताओं की मौजूदगी ने इसे राष्ट्रीय स्तर का राजनीतिक आयोजन बना दिया।

बंगाल की राजनीति में नए दौर की शुरुआत
भाजपा नेताओं ने इस जीत को “परिवर्तन का जनादेश” बताया है। पार्टी का कहना है कि बंगाल की जनता ने तुष्टीकरण और हिंसा की राजनीति को नकारते हुए विकास और नई राजनीतिक दिशा को चुना है। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह शपथ ग्रहण केवल सरकार गठन नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति में वैचारिक बदलाव का संकेत भी है।











