रांची: झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी को दूर करने के लिए राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। अब दूसरे राज्यों से आने वाले चिकित्सकों को झारखंड में अलग से रजिस्ट्रेशन (निबंधन) कराने की अनिवार्यता से राहत मिल सकती है। इसके लिए झारखंड स्टेट मेडिकल काउंसिल रूल, 2023 में संशोधन की तैयारी शुरू कर दी गई है।
स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव सह नोडल पदाधिकारी छवि रंजन की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक में इस प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में झारखंड मेडिकल काउंसिल के अध्यक्ष डॉ. साहिर पाल, रजिस्ट्रार सह सचिव डॉ. विमलेश कुमार सिंह और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) झारखंड के प्रतिनिधि डॉ. शंभू प्रसाद भी मौजूद रहे।
वर्तमान नियम बना हुआ है बड़ी बाधा फिलहाल झारखंड स्टेट मेडिकल काउंसिल रूल, 2023 के नियम 55 के तहत राज्य में प्रैक्टिस करने वाले हर डॉक्टर के लिए झारखंड मेडिकल काउंसिल में निबंधन अनिवार्य है। इसका असर यह हो रहा है कि दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा या अन्य राज्यों से आने वाले विशेषज्ञ चिकित्सकों को भी यहां सेवा देने से पहले अलग प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जबकि वे पहले से राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) या किसी अन्य राज्य मेडिकल काउंसिल में पंजीकृत होते हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इसी अतिरिक्त औपचारिकता के कारण कई विशेषज्ञ डॉक्टर झारखंड आने से बचते हैं। इसका सीधा असर राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है, खासकर मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी से जूझ रहा झारखंड राज्य के कई सदर अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, एनेस्थेटिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट और सर्जनों की भारी कमी लंबे समय से बनी हुई है। ग्रामीण इलाकों में स्थिति और गंभीर है, जहां मरीजों को बेहतर इलाज के लिए रांची या दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता है।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि यदि दूसरे राज्यों के डॉक्टरों को त्वरित अनुमति मिलती है, तो विशेषज्ञ सेवाओं की उपलब्धता तेजी से बढ़ सकती है। इससे सरकारी अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
सरकार को भेजी जाएगी संशोधन की अनुशंसा बैठक में तय किया गया कि नियमों में संशोधन को लेकर राज्य सरकार को औपचारिक अनुशंसा भेजी जाएगी। प्रस्ताव के तहत ऐसे चिकित्सकों को छूट देने पर विचार है, जो पहले से किसी मान्यता प्राप्त मेडिकल काउंसिल या राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग में पंजीकृत हैं।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, यदि यह संशोधन लागू होता है तो झारखंड में डॉक्टरों की नियुक्ति प्रक्रिया तेज होगी और मेडिकल संस्थानों को विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध कराने में आसानी होगी।
मरीजों को मिल सकता है सीधा फायदा विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से सबसे बड़ा लाभ मरीजों को मिलेगा। लंबे समय से इलाज और ऑपरेशन के लिए इंतजार कर रहे लोगों को अब अपने ही राज्य में बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी। साथ ही निजी अस्पतालों के साथ-साथ सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।








