आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में समय बचाने के लिए अक्सर हम एक ही तरह का भोजन रोज दोहराने लगते हैं। हमें लगता है कि वही पुराना नाश्ता या लंच हमारे स्वास्थ्य को संतुलित रख रहा है, लेकिन वास्तविकता इसके ठीक विपरीत हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि पेट की मजबूती सिर्फ अनुशासन से नहीं, बल्कि भोजन में मिलने वाली विविधता से तय होती है। जब हम महीनों तक एक ही तरह की थाली खाते हैं, तो हमारे शरीर के भीतर मौजूद करोड़ों सूक्ष्म जीव, जिन्हें ‘गट बैक्टीरिया’ कहा जाता है, कमजोर होने लगते हैं। इन सूक्ष्म जीवों को फलने-फूलने के लिए अलग-अलग प्रकार के रेशों और पोषक तत्वों की जरूरत होती है, जो केवल एक ही प्रकार के अनाज या सब्जी से मिलना मुमकिन नहीं है।
अमृता अस्पताल की क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट चारु दुआ बताती हैं कि भोजन की इस एकरसता का असर शुरुआत में तो मामूली दिखता है, लेकिन समय के साथ यह पेट फूलने, कब्ज और भारीपन जैसी गंभीर पाचन समस्याओं में बदल जाता है। रिसर्च में भी यह पाया गया है कि जो लोग सप्ताह भर में विभिन्न प्रकार की वनस्पति आधारित चीजों का सेवन करते हैं, उनका पाचन तंत्र उन लोगों की तुलना में कहीं अधिक मजबूत और सक्रिय होता है जो बहुत सीमित डाइट लेते हैं। भले ही आपकी नियमित थाली में दाल-चावल और सब्जी शामिल हो, लेकिन अलग-अलग अनाज और मौसमी सब्जियों के बिना शरीर उन खास प्राकृतिक तत्वों से वंचित रह जाता है जो आंतों के स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य हैं।

इस समस्या से बचने के लिए विशेषज्ञ पूरी जीवनशैली बदलने के बजाय छोटे और प्रभावी बदलावों की सलाह देते हैं। जैसे कि आप गेहूं या चावल के साथ-साथ बाजरा, ज्वार या रागी जैसे मोटे अनाजों को अपनी डाइट का हिस्सा बना सकते हैं। साथ ही, हर मौसम में आने वाली अलग-अलग सब्जियों और दालों का प्रयोग करें ताकि शरीर को विभिन्न प्रकार के फाइबर मिलते रहें। इसके अलावा, भोजन में दही या छाछ जैसे प्रोबायोटिक्स को शामिल करना भी पेट के मित्र बैक्टीरिया को संतुलित रखने में बहुत मददगार साबित होता है। याद रखें कि स्थिरता वजन नियंत्रण के लिए तो अच्छी हो सकती है, लेकिन एक स्वस्थ और लंबी उम्र के लिए आपकी थाली में रंग और विविधता का होना बेहद जरूरी है।








