कदमा भूमि विवाद पहुंचा अदालत, रैयती जमीन को ‘अनावाद बिहार सरकार’ घोषित करने पर उठे सवाल

Johar News Times
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जमशेदपुर, कदमा के उलियान निवासी सौमेन महतो उर्फ बापी ने अपनी पुश्तैनी जमीन की प्रकृति बदलकर उसे ‘अनावाद बिहार सरकार’ की श्रेणी में शामिल किए जाने पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस जमीन के लिए उनके परिवार ने वर्षों तक सरकार को टैक्स दिया, उसी भूमि को बाद में सरकारी जमीन बताकर टाटा लीज क्षेत्र में शामिल कर दिया गया।

सोमवार को उलियान स्थित अपने आवास पर आयोजित पत्रकार वार्ता में सौमेन महतो ने बताया कि विवादित जमीन कदमा अनिल सुर पथ स्थित है। संबंधित भूमि का पुराना प्लॉट नंबर 1248 और 1231 है, जबकि नया प्लॉट नंबर 66, 67, 68, 69 और 74 बताया गया है। जमीन का पुराना खाता नंबर 1 तथा नया खाता नंबर 1217 है।

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उन्होंने कहा कि वर्ष 1907 के सर्वे रिकॉर्ड में उक्त जमीन की प्रकृति ‘खेती’ दर्ज थी और इसके मूल रैयत दुर्गा चरण महतो थे। बाद में उनके परिवार ने दुर्गा चरण महतो के पुत्र से इस जमीन की खरीदारी की थी। वर्ष 1970 में नवंबर और दिसंबर माह में दो अलग-अलग सेल डीड के माध्यम से जमीन खरीदी गई थी। तब से यह जमीन उनके परिवार के नाम पर दर्ज है।

सौमेन महतो का कहना है कि यह जमीन शुरू से ही रैयती भूमि रही है, लेकिन सरकारी त्रुटि के कारण इसे ‘अनावाद बिहार सरकार’ की श्रेणी में डाल दिया गया। इसके साथ ही इसे टाटा लीज क्षेत्र में भी शामिल कर लिया गया।

उन्होंने कई सवाल उठाते हुए कहा कि यदि यह जमीन सरकारी थी, तो इसका रजिस्ट्रेशन और म्यूटेशन कैसे हुआ? सरकार ने इतने वर्षों तक इस जमीन का टैक्स क्यों लिया? वहीं अगर यह रैयती जमीन थी, तो आखिर किस आधार पर इसकी प्रकृति बदल दी गई?

मामले को लेकर उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। यह मामला सिविल जज (सीनियर डिवीजन-9) अदालत, जमशेदपुर में वाद संख्या 66/2022 के रूप में लंबित है। मामले की अगली सुनवाई 21 मई 2026 को निर्धारित की गई है।

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सौमेन महतो ने बताया कि इसी भूखंड में संदीप गोराई की भी जमीन है। उनका प्लॉट नंबर 1217 और 1248 में दर्ज है, जबकि नए रिकॉर्ड में प्लॉट नंबर 70 और 72 बताया गया है। पत्रकार वार्ता के दौरान संदीप गोराई भी उपस्थित थे।

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