सिंहभूम कॉलेज चांडिल में इंटर की पढ़ाई बंद: फेल हुए 110 छात्रों का भविष्य अधर में, उठ रहे गंभीर सवाल

शिक्षा के मंदिर में ताला, फेल हुए छात्रों का भविष्य हुआ हवाला!

Johar News Times
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कोल्हान विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले चांडिल अनुमंडल के एकमात्र प्रमुख शैक्षणिक संस्थान, सिंहभूम कॉलेज चांडिल से एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। कॉलेज में इंटरमीडिएट की पढ़ाई बंद होने के निर्णय ने न केवल नए छात्रों, बल्कि इस साल फेल हुए 110 विद्यार्थियों के भविष्य पर भी संकट के बादल मंडरा दिए हैं।

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50% छात्र हुए फेल, रिजल्ट पर छिड़ी बहस

इस वर्ष झारखंड एकेडमिक काउंसिल द्वारा घोषित इंटर साइंस के परिणामों में कॉलेज का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। कुल 220 विद्यार्थियों में से लगभग 110 छात्र-छात्राएं असफल रहे। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस कॉलेज का रिजल्ट कभी 75% रहता था, वह इस बार गिरकर 50% पर आ गया है। इससे अभिभावकों और छात्रों में भारी रोष है।

प्राचार्य का तर्क: “पेपर कठिन था और प्रोफेसर की थी कमी”

कॉलेज के प्राचार्य डॉ० सुनील मुर्मु ने खराब रिजल्ट के लिए दो मुख्य कारणों को जिम्मेदार ठहराया है:

  1. उनके अनुसार इस बार बोर्ड के सवाल काफी कठिन थे।
  2. उन्होंने स्वीकार किया कि फिजिक्स जैसे महत्वपूर्ण विषय में प्रोफेसर की कमी रही, जिससे पढ़ाई प्रभावित हुई।

जब उनसे छात्रों की अनुपस्थिति पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वे अभी 3-4 महीने पहले ही पदभार संभाले हैं और स्थिति को समझने की कोशिश कर रहे हैं।


फेल हुए छात्रों का क्या होगा? सामाजिक कार्यकर्ताओं ने घेरा

सबसे बड़ा सवाल उन 110 छात्रों का है जो इस साल सफल नहीं हो पाए। कॉलेज में इंटर की पढ़ाई बंद होने के कारण अब यह स्पष्ट नहीं है कि ये छात्र कंपार्टमेंट या अगले साल की परीक्षा के लिए फॉर्म कहाँ से भरेंगे।

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विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के सामाजिक कार्यकर्ता राकेश रंजन महतो ने कहा, “चांडिल अनुमंडल का यह इकलौता कॉलेज है जहाँ ईचागढ़, नीमडीह, कुकड़ू और यहाँ तक कि पश्चिम बंगाल से भी छात्र आते हैं। इंटर बंद करना और फेल छात्रों को उनके हाल पर छोड़ना दुर्भाग्यपूर्ण है।”

वहीं, सहज जन लोक कल्याण जागृति संगठन ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग करते हुए पूछा है कि यदि कॉलेज फॉर्म नहीं भरवाएगा, तो क्या इन बच्चों का साल बर्बाद हो जाएगा?

जैक बोर्ड के पाले में गेंद

प्राचार्य डॉ० मुर्मु का कहना है कि फेल छात्रों का फॉर्म भरा जाना पूरी तरह से JAC बोर्ड के निर्देशों पर निर्भर करेगा। यदि बोर्ड अनुमति देता है, तभी कॉलेज फॉर्म स्वीकार करेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आर्ट्स और कॉमर्स का प्रदर्शन साइंस की तुलना में काफी बेहतर रहा है।

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