जिले की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की पोल एक बार फिर खुल गई है। गोलपहाड़ी इलाके में हुए एक सड़क हादसे के बाद 108 एंबुलेंस सेवा समय पर उपलब्ध नहीं हो सकी। घंटों इंतजार करने के बाद, स्थानीय लोगों ने सूझबूझ दिखाई और गंभीर रूप से घायल युवक को एक निजी वाहन के जरिए जामताड़ा सदर अस्पताल पहुंचाया। इस घटना के बाद जिले की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है।
फोन करने पर मिला जवाब— ‘डेढ़ से दो घंटे लगेंगे’
जानकारी के अनुसार, गोलपहाड़ी के पास सड़क दुर्घटना में मोहन किस्कू नामक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया था। हादसे के तुरंत बाद मौके पर मौजूद स्थानीय ग्रामीणों और वार्ड पार्षद ने घायल की जान बचाने के लिए कई बार 108 एंबुलेंस सेवा को फोन किया।
“लापरवाही की हद तब हो गई जब एंबुलेंस सेवा के कंट्रोल रूम से जवाब मिला कि फिलहाल कोई भी एंबुलेंस खाली नहीं है और दुर्घटनास्थल तक वाहन पहुंचने में कम से कम डेढ़ से दो घंटे का समय लग सकता है।”
मसीहा बनी निजी इको वैन, अस्पताल में भर्ती
घायल मोहन किस्कू की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी और अत्यधिक खून बह रहा था। ऐसे में एंबुलेंस के भरोसे बैठने के बजाय स्थानीय लोगों ने खुद पहल की। ग्रामीणों ने तुरंत एक निजी इको वैन की व्यवस्था की और घायल को जामताड़ा सदर अस्पताल ले गए। सदर अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक, युवक की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है और उसका इलाज जारी है।
पहले भी एंबुलेंस न मिलने से जा चुकी है जान
जामताड़ा में 108 एंबुलेंस सेवा की यह पहली लापरवाही नहीं है। अभी हाल ही में एंबुलेंस का समय पर इंतजार करने के कारण एक मरीज की तड़प-तड़प कर मौत होने का गंभीर मामला सामने आया था। उस घटना से सबक लेने के बजाय स्वास्थ्य विभाग की यह ढुलमुल कार्यप्रणाली जारी है, जिसने आपातकालीन सेवाओं के दावों पर फिर से बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
