रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों की वित्तीय नीतियों पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि प्रतिबंधों, संपत्तियां फ्रीज किए जाने और वित्तीय दबाव के कारण दुनिया के कई देश, खासकर BRICS राष्ट्र, अब अमेरिकी डॉलर और यूरो पर निर्भरता कम कर अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा दे रहे हैं।
सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF) में संबोधित करते हुए पुतिन ने कहा कि पश्चिमी देशों द्वारा वित्तीय प्रणालियों के राजनीतिक उपयोग से वैश्विक भरोसा कमजोर हुआ है। उन्होंने रूस की विदेशी संपत्तियों को फ्रीज किए जाने को “चोरी” करार देते हुए कहा कि इससे डॉलर और यूरो जैसी प्रमुख मुद्राओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए हैं। पुतिन के अनुसार, इसी वजह से BRICS और अन्य विकासशील देश अब आपसी व्यापार में स्थानीय मुद्राओं, डिजिटल वित्तीय परिसंपत्तियों और केंद्रीय बैंकों की डिजिटल करेंसी (CBDC) का उपयोग बढ़ा रहे हैं। उन्होंने बताया कि रूस के कुल निर्यात का लगभग 65 प्रतिशत कारोबार अब रूबल में हो रहा है।
BRICS को बताया वैश्विक विकास का नया केंद्र
रूसी राष्ट्रपति ने दावा किया कि पिछले पांच वर्षों में वैश्विक आर्थिक वृद्धि में BRICS देशों का योगदान 49 प्रतिशत रहा, जबकि G7 देशों का योगदान केवल 18 प्रतिशत रहा। क्रय शक्ति समता (PPP) के आधार पर वैश्विक GDP में BRICS की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जबकि G7 की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत से कम रह गई है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 में ही BRICS ने आर्थिक आकार के मामले में G7 को पीछे छोड़ दिया था और यह अंतर लगातार बढ़ रहा है।
नए व्यापारिक गलियारों पर जोर
पुतिन ने कहा कि वैश्विक व्यापार का केंद्र अब पूर्व और दक्षिण की ओर स्थानांतरित हो रहा है। उन्होंने नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर, ट्रांस-आर्कटिक रूट तथा मध्य एशिया, कैस्पियन सागर और मध्य पूर्व से जुड़ने वाले नए व्यापारिक मार्गों को भविष्य की आर्थिक धुरी बताया। उन्होंने विश्व व्यापार संगठन (WTO) की भी आलोचना करते हुए कहा कि पश्चिमी देश तब तक वैश्विक नियमों का समर्थन करते रहे, जब तक उन्हें उससे लाभ मिलता रहा। प्रतिस्पर्धा बढ़ने पर उन्होंने एकतरफा प्रतिबंधों और दबाव की नीति अपनाई, जिससे अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है। पुतिन का कहना है कि बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में BRICS और ग्लोबल साउथ की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है तथा आने वाले वर्षों में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार का दायरा और बढ़ सकता है।
