अफ्रीका में फिर पैर पसार रहा है जानलेवा इबोला वायरस: कांगो-युगांडा में बढ़ा खतरा, जानें लक्षण और बचाव के उपाय

अफ्रीका के कई हिस्सों में जानलेवा इबोला वायरस (Ebola Virus) एक बार फिर तेजी से फैल रहा है।

Johar News Times
4 Min Read

अफ्रीका के कई हिस्सों में जानलेवा इबोला वायरस (Ebola Virus) एक बार फिर तेजी से फैल रहा है। इसे लेकर दुनियाभर की स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंताएं अचानक बेहद बढ़ गई हैं। खासतौर पर कांगो और युगांडा से सामने आ रहे मामलों ने हेल्थ एक्सपर्ट्स को हाई अलर्ट पर डाल दिया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और इम्पीरियल कॉलेज लंदन के रिसर्चर्स की एक नई एनालिसिस में दावा किया गया है कि कांगो में इबोला इंफेक्शन के वास्तविक मामले आधिकारिक आंकड़ों से कहीं ज्यादा हो सकते हैं।

रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा: 1000 से ज्यादा हो सकती है मरीजों की संख्या

रिपोर्ट के मुताबिक, मई के मध्य तक इबोला के 400 से 800 मामले सामने आ चुके हो सकते हैं। वहीं कुछ एक्सपर्ट्स ने आशंका जताई है कि यह संख्या 1000 को भी पार कर चुकी है। सबसे ज्यादा गंभीर स्थिति कांगो के ‘इटुरी प्रांत’ में बनी हुई है, जहां अप्रैल के आखिर से संक्रमण लगातार फैल रहा है।

कैसे फैलता है इबोला वायरस का खतरा?

सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, इबोला एक बेहद खतरनाक और जानलेवा वायरल बीमारी है। इसके फैलने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • बॉडी फ्लूइड्स के जरिए: यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के खून, पसीने, उल्टी, लार या अन्य बॉडी फ्लूइड्स (Body Fluids) के सीधे संपर्क में आने से फैलता है।
  • इनके लिए सबसे ज्यादा जोखिम: हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इबोला हवा या पानी से नहीं फैलता, लेकिन मरीज की देखभाल करने वाले डॉक्टर, नर्स और परिवार के लोग इसके सबसे ज्यादा जोखिम में रहते हैं।

क्या हैं इबोला के शुरुआती लक्षण?

शुरुआत में इबोला के लक्षण किसी सामान्य वायरल बुखार जैसे ही दिखाई देते हैं, जिससे इसे पहचानना काफी मुश्किल होता है।

सामान्य लक्षण:

  • तेज बुखार और सिरदर्द
  • बदन दर्द और अत्यधिक कमजोरी
  • गले में खराश या दर्द

गंभीर लक्षण:

बीमारी बढ़ने पर मरीज को उल्टी, दस्त, स्किन पर रैशेज (चकत्ते) होने लगते हैं। कई गंभीर मामलों में शरीर के अंदरूनी या बाहरी अंगों से ब्लीडिंग (खून बहना) भी शुरू हो जाती है।

इंफेक्शन के बाद लक्षण दिखने में 2 से 21 दिन तक का समय लग सकता है (औसतन 8 से 10 दिन)। राहत की बात यह है कि जब तक मरीज में लक्षण शुरू नहीं होते, तब तक वह वायरस नहीं फैला सकता।

इबोला से बचाव के उपाय: एक्सपर्ट्स की सलाह

अपोलो हॉस्पिटल्स के डॉक्टर्स के मुताबिक, इबोला का कोई सटीक इलाज न होने के कारण ‘सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव’ है। पोर्टल के पाठकों के लिए एक्सपर्ट्स ने ये जरूरी गाइडलाइंस दी हैं:

  • मरीज से दूरी: किसी भी संक्रमित या संदिग्ध मरीज के सीधे संपर्क में आने से बचें।
  • हाथों की सफाई: बार-बार हाथों को साबुन और पानी या सैनिटाइज़र से अच्छी तरह साफ करें।
  • ट्रैवल हिस्ट्री पर नजर: अगर कोई व्यक्ति हाल ही में इबोला प्रभावित देश या इलाके से लौटा हो और उसे तेज बुखार या कमजोरी हो, तो उसे तुरंत आइसोलेट कर मेडिकल जांच करानी चाहिए।
  • वैक्सीनेशन और ट्रेसिंग: हेल्थ एजेंसियों के अनुसार, इबोला को रोकने में समय पर वैक्सीनेशन और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग (मरीज के संपर्क में आए लोगों की पहचान) सबसे प्रभावी हथियार हैं।
  • हेल्थ वर्कर्स के लिए सख्त नियम: अस्पतालों में डॉक्टरों और स्टाफ के लिए PPE किट, मास्क, ग्लव्स और सख्त संक्रमण नियंत्रण उपायों का पालन करना अनिवार्य है।

Share This Article