केंद्र की सख्त चेतावनी! SAIL और BHEL पर मंडराया महारत्न दर्जा खोने का खतरा

केंद्र की सख्त चेतावनी! SAIL और BHEL पर मंडराया महारत्न दर्जा खोने का खतरा

Johar News Times
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खराब वित्तीय प्रदर्शन पर सरकार ने जारी किया नोटिस, एक साल में सुधार नहीं हुआ तो नवरत्न श्रेणी में हो सकती हैं पदावनत,

नई दिल्ली : सार्वजनिक क्षेत्र की दो दिग्गज कंपनियां SAIL (स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड) और BHEL (भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड) अपने महारत्न दर्जे को लेकर संकट में घिर गई हैं। केंद्र सरकार ने दोनों कंपनियों के पिछले तीन वर्षों के वित्तीय प्रदर्शन की समीक्षा के बाद उन्हें चेतावनी नोटिस जारी करते हुए एक वर्ष के भीतर प्रदर्शन सुधारने का निर्देश दिया है। सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट सचिवालय और लोक उद्यम विभाग (DPE) ने स्पष्ट किया है कि अगले एक वर्ष तक दोनों कंपनियों के प्रदर्शन की लगातार निगरानी की जाएगी। इसके बाद दोबारा समीक्षा होगी। यदि निर्धारित वित्तीय मानकों के अनुरूप सुधार नहीं दिखा तो दोनों कंपनियों का महारत्न दर्जा वापस लेकर नवरत्न श्रेणी में रखा जा सकता है।

5 हजार करोड़ रुपये लाभ का मानक नहीं हो रहा पूरा

सरकारी नियमों के अनुसार किसी भी महारत्न कंपनी को अपना दर्जा बनाए रखने के लिए लगातार तीन वर्षों में औसतन कम से कम 5,000 करोड़ रुपये का वार्षिक शुद्ध लाभ अर्जित करना आवश्यक है। बताया जा रहा है कि SAIL इस अनिवार्य मानक को पूरा नहीं कर पाई है, जबकि BHEL का प्रदर्शन भी निर्धारित अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहा। लोक उद्यम विभाग ने दोनों कंपनियों के प्रबंधन को लाभप्रदता बढ़ाने, परिचालन दक्षता सुधारने और वित्तीय स्थिति मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा है।

SAIL और BHEL के लिए क्यों अहम है महारत्न दर्जा?
SAIL को मई 2010 और BHEL को फरवरी 2013 में महारत्न का दर्जा दिया गया था। यह दर्जा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को बड़े निवेश और कारोबारी निर्णय लेने में अधिक स्वायत्तता प्रदान करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि महारत्न दर्जा सिर्फ प्रतिष्ठा का विषय नहीं, बल्कि कंपनियों की कारोबारी क्षमता और स्वतंत्र निर्णय लेने की शक्ति से भी जुड़ा होता है। ऐसे में आने वाला एक वर्ष SAIL और BHEL दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अब निगाहें अगले एक साल पर
सरकार की चेतावनी के बाद दोनों कंपनियों के सामने वित्तीय प्रदर्शन सुधारने की बड़ी चुनौती है। यदि अगले एक वर्ष में लाभ और कारोबारी परिणामों में उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ, तो देश की इन दो प्रमुख सार्वजनिक कंपनियों को महारत्न से नवरत्न बनने का झटका लग सकता है।

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