घाटशिला कॉलेज के विस्तार और नए कैंपस निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए कॉलेज प्रशासन ने अतिरिक्त भूमि की मांग को लेकर अंचल कार्यालय से संपर्क किया। इस क्रम में कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरके चौधरी मंगलवार को अंचल अधिकारी निशात अम्बर से उनके कार्यालय में मिले और विस्तार योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की।
इस बैठक में कॉलेज के वरीय शिक्षक डॉ. एसपी सिंह, डॉ. संदीप चंद्र एवं डॉ. महेश्वर प्रमाणिक भी उपस्थित थे। अंचल अधिकारी एवं अंचल निरीक्षक लखिन्द्र मांझी के साथ हुई वार्ता में प्रारंभिक रूप से घाटशिला कॉलेज के लिए बैतालपुर मौजा अंतर्गत हैंदलजोड़ी पंचायत में लगभग 5 एकड़ अतिरिक्त भूमि चिन्हित की गई।
विस्तार के लिए विश्वविद्यालय से सरकार तक पहुंचा प्रस्ताव
ज्ञात हो कि घाटशिला कॉलेज के लिए अलग कैंपस विकसित करने के उद्देश्य से प्राचार्य डॉ. आरके चौधरी द्वारा अतिरिक्त भूमि का प्रस्ताव तैयार कर कोल्हान विश्वविद्यालय में जमा कराया गया था। विश्वविद्यालय स्तर से यह प्रस्ताव आगे बढ़ाते हुए झारखंड सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक को भेजा गया, जहां से विभागीय सहयोग की मांग की गई।
इसके बाद निदेशक, उच्च शिक्षा द्वारा पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त को पत्र भेजकर घाटशिला कॉलेज के लिए 5 एकड़ भूमि चिन्हित कर उसे विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित करने का अनुरोध किया गया। इसी क्रम में अपर उपायुक्त द्वारा अंचल अधिकारी घाटशिला को भूमि चिन्हांकन एवं सत्यापन प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।
व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए अलग कैंपस की आवश्यकता
वार्ता के दौरान प्राचार्य डॉ. चौधरी ने बताया कि आने वाले समय में कॉलेज में कई व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू किए जाने की योजना है, जिसमें बीएड कोर्स भी शामिल हैं। इसके लिए अलग कैंपस का होना अत्यंत आवश्यक है। साथ ही स्टाफ क्वार्टर निर्माण की आवश्यकता भी बताई गई।
लीज नवीकरण पर भी हुई चर्चा
बैठक में प्राचार्य ने अंचल अधिकारी से यह भी आग्रह किया कि वर्ष 1975 में तत्कालीन बिहार के राज्यपाल सचिवालय द्वारा घाटशिला कॉलेज को लीज पर दी गई भूमि का सत्यापन कर उसका लीज नवीकरण कराया जाए।
इस पर अंचल अधिकारी निशात अम्बर ने सहमति जताते हुए कहा कि प्रस्ताव को पुनः कार्यालय में जमा कराया जाए, ताकि अग्रेतर कार्रवाई शीघ्र शुरू की जा सके।
घाटशिला कॉलेज के विस्तार को लेकर हुई इस पहल को शिक्षा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में उच्च शिक्षा के नए अवसर सृजित होने की संभावना है।











